यूपी में राहुल का किसान कार्ड क्यों?

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: यूपी चुनाव में राहुल गांधी का किसान कार्ड भाजपा को नुकसान पहुंचायेगा. किसान कार्ड की बदौलत राहुल गांधी भले ही कांग्रेस को चौथे से पहले स्थान पर न ला पाये परन्तु उनकी कोशिश है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखा जाये. राहुल गांधी की सोची-समझी रणनीति के तहत इन दिनों यूपी में किसानों से मिल रहें हैं. जिसमें ख़ासकर उन किसानों को बुलाया जा रहा है जो कर्ज में डूबे हुये हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी उनसे कर्ज माफी तथा बिजली के बिल आधे किये जाने की बात कर रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि वामपंथियों के समर्थन से बनी साल 2009 की यूपीए सरकार ने किसानों के करीब 60 हजार करोड़ रुपयों के कर्ज माफ कर दिये थे. उस समय हुये लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यूपी की 80 में से 21 सीटों पर जीत मिली थी. जिसका श्रेय किसानों की कर्ज माफी के साथ-साथ मनरेगा को दिया गया.


जाहिर सी बात है कि राहुल गांधी उसी पुराने तीर से फिर से निशाना लगा रहे हैं. हाल ही में राहुल गांधी के तीन दिन के दौरे में कदौरा से लेकर कालपी तक लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. राहुल ने अपनी सभा में भाजपा, सपा और बसपा पर जमकर निशाना साधा.

इस चुनाव में कांग्रेस की रणनीति ब्राह्मण, ठाकुर और मुसलमानों को अपनी ओर खींचने की है. इन सभी को मिला दें तो वोट शेयर 35 फ़ीसदी बनता है.

ज्यादातर किसान ओबीसी हैं. तो फिर राहुल गांधी ने क्यों एक महीना उन्हें अपनी ओर करने में बर्बाद किया जबकि वो ओबीसी से कोई उम्मीद ही नहीं लगा रहे हैं?

कांग्रेस की यह जी तोड़ कोशिश यूपी में जीतने के मंसूबे से नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के मकसद से की जा रही है. भाजपा ग़ैर-यादव ओबीसी वोटरों को एकजुट करने में लगी हुई है, वहीं कांग्रेस, भाजपा की इस कोशिश की हवा निकालने में लगी है.

भाजपा जहां जातीय पहचान और हिंदुत्व कार्ड खेलकर यह काम कर रही है. वहीं कांग्रेस वर्गीय पहचान के आधार पर इसे असफल करने का प्रयास कर रही है.

राहुल गांधी के भाषण से साफ तौर पर दिखता है कि वो किसानों के असंतोष का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं. यह असंतोष किसी हिंदू या जातीय हैसियत के कारण नहीं पनपा है बल्कि खेती-बाड़ी की नीतियों की वजह से आया है.

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोदी सरकार की चुप्पी और दो साल से सूखे के हालात ने किसानों को हताशा की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है.

राहुल गांधी किसानों की कर्ज माफी को टालने, बिजली बिल कम न करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य न बढ़ाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर रहे हैं. राहुल गांधी, भाजपा सरकार को कार्पोरेट हितैषी तथा किसान विरोधी के रूप में पेश कर रहें हैं.

राहुल के रणनीतिकार प्रशांत किशोर उम्मीद कर रहे हैं कि देवरिया से दिल्ली तक की किसान यात्रा राहुल की छवि को एक परिपक्व राजनेता और गरीब हितैषी के तौर पर उभारेगी.

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