राहुल चाहते हैं प्रियंका राजनीति में आये

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चाहते हैं कि प्रियंका गांधी राजनीति में आये. राहुल गांधी का यह भी कहना है कि राजनीति में आने का प्रियंका का फैसला खुद का होगा. यह वो खबर है जिसे देश के लाखों कांग्रेसी सुनना चाहते हैं. लेकिन क्या प्रियंका गांधी वाकई में सक्रिय राजनीति में उतरने जा रही है या यह केवल एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कही है, इसे परखने के लिये अभी इंतजार करना पड़ेगा. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ के हवाले से खबर है कि राहुल गांधी ने कहा कि मैं सबसे ज्‍यादा अपनी बहन पर भरोसा करता हूं. मैं चाहता हुं कि वह राजनीति में सक्रिय हों. लेकिन यह फैसला उनको करना है कि कब, कैसे और क्‍या वह आना चाहती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए राहुल ने उन्‍हें किसानों के प्रति असंवेदनशील बताया. उन्‍होंने कहा कि पीएम को आरएसएस ने झूठ बोलने में माहिर बनाया है. वे ‘सेल्‍फी लेने और झूठे वादे करने की मशीन’ हैं. यूपी चुनावों के सांप्रदायिक रंग लेने का अनुमान लगाते हुए राहुल ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस केवल हिंसा और नफरत फैलाने के ही काबिल हैं.

बीएसपी के साथ गठबंधन से इनकार करते हुए कांग्रेस उपाध्‍यक्ष ने कहा कि यूपी में कांग्रेस के सरकार बनाती दिख रही है. उन्‍होंने कहा कि मायावती और मुलायम सिंह यादव दोनों को ही जल्‍दी ही कोई भाव नहीं देगा.

उन्होंने कहा, “बांटने वाली राजनीति के चलते यूपी में काफी समस्‍यायें हैं. सत्‍ता का अत्‍यधिक केंद्रीकरण जहां एक या चार लोग पूरे राज्‍य पर राज करें, यह नहीं चल सकता. मेरा मानना है कि कांग्रेस के पास यूपी को बदलने की ताकत है. अगर हम लोगों को यह भरोसा दिला सकें कि हम यह कर सकते हैं तो यूपी को इस कीचड़ से बाहर निकाला जा सकता है.”

राहुल गांधी ने कहा, “अगर बीजेपी यह कहती है कि कर्ज माफी का हमारा आइडिया बुरा है तो फिर उद्योगपतियों के 1.10 लाख करोड़ रुपये के लोन को माफ कर देना भी गलत है. हमारा लक्ष्‍य है पीएम मोदी पर यह स्‍वीकार करने का दबाव बनाना कि अगर वह अमीरों की मदद करेंगे तो उन्‍हें गरीबों की मदद भी करनी होगी. उनके साथ भी समान व्‍यवहार होना चाहिये.”

राहुल गांधी इन दिनों अपना सारा ध्यान यूपी चुनाव की तैयारी में लगाये हुये हैं. यदि कांग्रेस यूपी चुनाव में आशातीत सफलता पा सकी तो अगले लोकसभा चुनाव के लिये उसे एक मजबूत जमीन मिल जायेगी. इसमें दो मत नहीं है कि प्रियंका गांधी के तेवर उनकी दादी स्व इंदिरा गांधी से मिलते-जुलते हैं परन्तु सबसे बड़ा सवाल है कि क्या वह वाकई में सक्रिय राजनीति में उतरकर कांग्रेस की नैया पार लगाने की कोशिश करेगी या अपने केवल राहुल-सोनिया के चुनाव क्षेत्र तक सीमित रखेगी?

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