राजीव के हत्यारों की फांसी रद्द

नई दिल्ली | संवाददाता: राजीव गांधी के हत्यारों को अब फांसी नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुये तीन हत्यारों को फांसी की सज़ा रद्द कर दी है. फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि इन हत्यारों को लगभग आजीवान कारावास के बराबर जेल की सज़ा भुगतने के बाद रिहा किया जायेगा या नहीं.

गौरतलब है कि राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में की गई थी. पेरारीवलन, संथन, मुरुगन और नलिनी नामक अभियुक्तों को राजीव गांधी हत्या मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई थी और इनकी दया याचिका भी खारिज कर दी गई थी. बाद में नलिनी के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था.


राजीव गांधी के हत्यारों मुरूगन, संतन और पेरारिवलन को फांसी की सज़ा दी गई थी, लेकिन पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इनकी मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया था.

राजीव गांधी की हत्या में शामिल नलिनी, रॉबर्ट, जया कुमार और रविचंद्रन पहले से उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.

तमिलनाडु सरकार सभी गुनहगारों को रिहा करना चाहती है. उम्र क़ैद की सज़ा माफ़ करने का अधिकार राज्य सरकार का होता है. लेकिन केंद्र सरकार इसका विरोध कर रही थी. केंद्र का कहना था कि ऐसा करने से ग़लत परंपरा शुरू होगी.

लिहाज़ा सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संविधान पीठ को अधिकार को सौंप दिया था कि वो तय करे इस मामले को किस सरकार के तहत माना जाए. पीठ इसे जिस सरकार के तहत मानेगी, उसके पास इन दोषियों की सजा के संबंध में फैसला लेने का अधिकार होगा.

फरवरी 2014 में इन सातों गुनाहगारों को तमिलनाडु ने रिहा करने का करने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए राज्य सरकार के अधिकार को चुनौती दी थी. अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी हत्यारों की फांसी की सज़ा को रद्द कर दिया है.

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