राज्यसभा ने आधार विधेयक लौटाया

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: राज्यसभा ने बुधवार को चार संशोधनों के साथ आधार विधेयक लोकसभा को लौटा दिया. इसमें एक संशोधन आधार को स्वैच्छिक बनाए रखने का भी है, जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह स्पष्ट किया कि निजता की सुरक्षा के लिए विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इसका उद्देश्य सही हितग्राही तक सब्सिडी का लाभ पहुंचाना है. आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ तथा सेवाओं का लक्षित वितरण) विधेयक-2016 पर सदन में तीखी बहस हुई और विपक्ष ने इसे धन विधेयक के रूप में पेश किए जाने पर सवाल उठाया.

राज्यसभा में पारित चार संशोधनों में शामिल हैं आधार पंजीकरण (धारा 3), सरकारी सेवाओं और सब्सिडी के लिए आधार की अनिवार्यता (धारा-7), राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सूचना का सार्वजनिक किया जाना (धारा 33) और निजी व्यक्तियों को आधार के उपयोग की अनुमति (धारा 57).


सदन में सुझाव दिया गया कि आधार को स्वैच्छिक रखा जाए, राष्ट्रीय सुरक्षा की जगह सार्वजनिक सुरक्षा और आपात स्थित में सूचनाओं को सार्वजनिक करने की अनुमति दी जाए, निजी व्यक्तियों द्वारा आधार उपयोग की धारा को हटाया जाए.

सभी चार संशोधनों का प्रस्ताव कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश ने पेश किए.

रमेश ने कहा, “मेरे पास आधार नंबर नहीं है और मुझे चाहिए भी नहीं, क्योंकि मैं सब्सिडी का लाभार्थी नहीं हूं. लेकिन कल मुझे यदि मोबाइल नंबर लेना हो, तो मुझसे आधार नंबर मांगा जाएगा. आपने इसे अनिवार्य बना रखा है.”

जेटली ने इस पर कहा कि आधार अनिवार्य नहीं है.

जेटली ने जवाब में कहा, “जिनके पास आधार नंबर नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक दस्तावेज बताए जाएंगे.”

जेटली ने कहा, “कल यदि तमिलनाडु सरकार एक विशेष आय वर्ग के लोगों के लिए सब्सिडी देने का फैसला करती है, तो उसका लाभ लेने के लिए आधार अनिवार्य है.”

मंत्री ने कहा, “यदि सब्सिडी बिना पहचान के दी जाए, तो योग्यता नहीं रखने वालों को सब्सिडी मिलेगी और योग्य को सब्सिडी नहीं मिल पाएगी. इसलिए लोगों को सब्सिडी का लाभ देने के लिए आधार कार्ड या अन्य वैकल्पिक दस्तावेज को पूर्व शर्त बनाना होगा.”

उन्होंने कहा कि विधेयक के तहत निजी सूचनाओं को संबंधित व्यक्ति की सहमति से ही साझा किया जा सकता है और यदि सहमति हो तब भी मुख्य बायोमेट्रिक सूचनाओं को साझा नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, “निजी सूचना साझा किए जाने का एक मात्र आधार राष्ट्रीय सुरक्षा होगा. एक प्राधिकार दिल्ली में बनाया जाएगा. प्राधिकार के फैसले की समीक्षा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाला प्राधिकार करेगा.”

विधेयक के धन विधेयक बनाए जाने के सवाल पर सदन के उप सभापति पी.जे. कुरियन ने यह स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मुद्दे पर फैसला दिया है और इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि भूलवश इसे धन विधेयक में परिवर्तित कर दिया गया है.

कुरियन ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष ने क्या किया है, उस पर हम कोई फैसला नहीं दे सकते. संविधान में स्पष्ट है-अध्यक्ष का फैसला अंतिम होता है.”

इस पर जेटली ने कहा, “धारा 110 तय करता है कि किसे धन विधेयक बनाया जाएगा. यदि धन देश के समेकित निधि में जाता है या उससे निकलता है और विधेयक इससे संबंधित है, तो यह धन विधेयक होगा.”

उन्होंने कहा, “धारा 110 (3) कहती है कि लोकसभा अध्यक्ष की राय मान्य होगी. अध्यक्ष यदि कह देगा कि मैं इसे धन विधेयक घोषित करता हूं, तो यह धन विधेयक हो जाएगा. कोई अन्य प्राधिकार इसे चुनौती नहीं दे सकता है.”

उन्होंने मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि सरकार जल्दबाजी कर रही है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ आधार मामले पर विचार कर रही है.

जेटली ने कहा, “सरकार ने जो कानून नहीं बनाया है, यदि उसे अदालत में चुनौती दे दी जाती है, तो उससे कानून बनाने का संसद का अधिकार खत्म नहीं हो जाता है.”

आधार विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और इसके धन विधेयक होने के नाते राज्यसभा को इसे संशोधित करने का अधिकार नहीं है. राज्यसभा सिर्फ संशोधन का सुझाव दे सकता है, जिसे स्वीकार करना या न करना लोकसभा पर निर्भर करता है.

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