सूखा पीड़ितों की मदद करेंगे: रमन सिंह

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सूखा पीड़ित किसानों को मदद का भरोसा दिलाया है. उन्होंने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘रमन के गोठ’ में कहा कि मैं किसान का बेटा हूं तथा किसानों की पीड़ा को समझता हूं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रविवार प्रदेश के जनता के लिए आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “रमन के गोठ” की चौथी कड़ी में जहॉ सूखा पीड़ित किसानों की मदद के लिए अपनी सरकार की वचनबद्धता प्रकट की, वहीं उन्होनें नक्सल हिंसा पीड़ित दंतेवाड़ा जिले के 128 गांवों मे एक हजार से भी ज्यादा किसानों द्वारा की जा रही जैविक खेती के लिए इन किसानों की विशेष रूप से तारीफ की.

डॉ. सिंह ने किसानों के लिए मिट्टी अच्छी सेहत की जरूरत पर बल दिया और उन्हें यह भी बताया कि मिट्टी के नमूनों की जांच के लिए राज्य में आठ नई प्रयोगशालाएं खोलने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने प्रदेश की सात विशेष पिछड़ी जनजातियों के लगभग एक लाख 94 हजार सदस्यों की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए 11 सूत्रीय समयबद्ध विशेष अभियान चलाने की भी घोषणा की.


डॉ रमन सिंह ने रेडियो कार्यक्रम में चर्चा की शुरूआत करते हुए, विश्व मृदा दिवस और खेती किसानी की बातो का जिक्र किया. किसानों को संदेश देते हुए सूखे की प्राकृतिक विपदा के संदर्भ में कहा कि मैं भी किसान का बेटा हूं और आपकी पीड़ा को समझता हूं. किसानों की पीड़ा को कम करने के लिए राज्य सरकार ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किये है कि आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों के तहत किसानों को राहत राशि का वितरण तत्काल प्रारंभ किया जाए. डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के तहत अब तक लगभग दस लाख श्रमिक पंजीकृत होकर शामिल हो चुके हैं.

उन्होंने ‘रमन के गोठ’ में प्रदेश की विशेष पिछड़ी सात विशेष पिछड़ी जनजातियों के समयबद्ध 11 सूत्रीय विशेष अभियान शुरू करने की भी जानकारी दी. उन्होनें कहा कि इस कार्यक्रम के तहत हमारे राज्य में अभी भी बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबूझमाड़िया, पण्डो और भुंजिया ऐसी विशेष पिछड़ी जनजातियां हैं, जिनकी कुल जनसंख्या राज्य में एक लाख 94 हजार से अधिक है. राज्य सरकार ने इनके विकास के लिए “विशेष समयबद्ध अभियान” चलाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत उन्हें अन्य लोगों की तरह जीवन की सभी मूलभूत सुविधाएं 03 वर्ष के भीतर उपलब्ध हो सकेगी.

इन जनजातियों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से 300 नये फुलवारी केंद्रों की स्थापना भी की जाएगी. ये जनजातियां अभी भी अपनी आजीविका के लिए वनोपज संग्रह, पारम्परिक कृषि, कन्दमूल और जड़ी-बूटी जैसे साधनों पर निर्भर हैं.

डॉ. सिंह ने कहा कि इस 11 सूत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत समस्त आवासहीन परिवारों के लिए आवास की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, सभी बसाहटों का विद्युतीकरण, सभी का स्वास्थ्य परीक्षण एवं हेल्थ कार्ड प्रदाय, परिवार के न्यूनतम एक सदस्य को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे हुनरमंद होकर अपनी आजीविका चला सकें. साथ ही सभी परिवारों को सामाजिक एवं खाद्य सुरक्षा का कवरेज तथा राशन कार्ड और पोषण आहार प्रदाय, वन अधिकार पत्र तथा जाति प्रमाण पत्र एवं निवास प्रमाण पत्रों का वितरण, ताकि इनके लिए उन्हें भटकना ना पड़े और उन्हें बाहरी दुनिया से जोड़ने व जागरूकता लाने के उद्देश्य से सूचना के सबसे सुलभ माध्यम के रूप में एक रेडियो और धूप और बरसात से ठंड से बचने के लिए छाता एवं कंबल निशुल्क प्रदान करना शामिल है.

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