शिक्षाकर्मी को 5 तारीख तक वेतन

रायपुर। डेस्क: छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मी को अब सैलरी 5 तारीख तक दी जाएगी. सैलरी के लिए उन्हें विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. उन्हें हर महीने की 5 तारीख वेतन मिल जाएगा. इसके अलावा अंशदायी पेंशन योजना, समयमान वेतनमान का लाभ, पदोन्नति, परामर्शदात्री समिति की बैठक और गैर शैक्षणिक कार्य मे ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी. इसको लेकर शनिवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने दिशा निर्देश जारी किए हैं.

हालांकि इस मामले में अभी भी शिक्षाकर्मी संघ के नेताओं का मानना है कि ऐसे आदेश पहले भी निकलते रहे हैं, लेकिन इसका बहुत ज्यादा फायदा शिक्षा कर्मियों को हुआ नहीं. पिछले दिनों पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ शिक्षाकर्मी संगठन के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी. इसके बाद यह निर्णय लिया गया है. शिक्षाकर्मी नेताओं के मुताबिक लड़ाई इसी बात की तो थी कि कहते कुछ हैं औ्र करते कुछ हैं. यदि सरकार की मंशा अच्छी भी हो, तो अफसरों की टीम उसे सही तरीके से लागू नहीं करने देती.


शिक्षकों को मिलेगा समयमान वेतनमान
विभाग के अनुसार सूचना मिली थी कि कई शिक्षक पंचायत संवर्ग एक ही पद पर लम्बे समय से सेवा देते आ रहे हैं. उनकी सेवा पूर्ण हो चुकी है. इसके बाद भी उन शिक्षकों को समयमान वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा है. विभाग ने पात्र शिक्षकों पंचायत संवर्ग के कर्मचारियों को शासन के दिशा निर्देश के अनुरूप समयमान वेतनमान का लाभ देने की बात कही है.

पदोन्नति का मिलेगा लाभ
प्रदेश के जिला और जनपद पंचायत के अंतर्गत कार्यरत शिक्षक पंचायत संवर्ग के कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची तैयार की जा रही है. इसे 1 अप्रैल तक प्रकाशित किया जाएगा. इसमें शासन के दिशा-निर्देश प्राप्त होने पर सहायक शिक्षक (पंचायत) से शिक्षक (पंचायत) और शिक्षक (पंचायत) से व्याख्याता (पंचायत) के पद पर पदोन्नति दी जाएगी.

हर तीसरे महीने होगी परामर्शदात्री समिति की बैठक
शिक्षाकर्मियों के जिला और जनपद पंचायत स्तर की मांगों के निराकरण को लेकर परामर्शदात्री समिति का गठन किया जाएगा. समिति में शिक्षक (पंचायत) संवर्ग के पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा. जिला स्तर पर हर तीसरे महीने और जनपद पंचायत स्तर पर हर महीने परामर्शदात्री समिति की बैठक होगी. इसमें शिक्षाकर्मियों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा.

गैर शैक्षणिक काम में नहीं लगेगी ड्यूटी
प्रदेश के शिक्षाकर्मियों से स्कूल में पढ़ाने के अलावा कोई भी गैर शैक्षणिक काम नहीं लिए जाएंगे. इसे लेकर भी दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि शिक्षाकर्मियों से सिर्फ शैक्षणिक काम ही करवाए जाएं.

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