हर तीसरा व्यक्ति गरीब

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: रंगराजन समिति ने तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट को झुठलाया. योजना आयोग में राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह को सौंपी रंगराजन समिति की रिपोर्ट ने माना है कि देश में हर 10 में से 3 व्यक्ति गरीब है. इसी के साथ रंगराजन समिति ने गांव में 32 रुपये तथा शहरों में 47 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले को गरीब नहीं माना है. इस तरह से रंगराजन समिति ने तेंदुलकर समिति के द्वारा तय किया गया गरीबी की रेखा का पैमाना ही बदल दिया है.

रंगराजन समिति ने 2011-12 के लिये गांवों में 972 रुपये तथा शहरों में 1407 रुपये प्रतिमाह खर्च करने की सामर्थ्य रखने वाले को गरीब नहीं माना है जबकि तेंदुलकर समिति ने इसे गांवों के लिये 816 तथा शहरों के लिये 1000 रुपये माना था. रंगराजन समिति द्वारा गरीबी की रेखा को, तेंदुलकर समिति द्वारा तय किये गये गरीबी की रेखा से ऊपर कर देने से देश में गरीबो की संख्या बढ़ गई है.

रंगराजन समिति के अनुमानों के अनुसार, 2009-10 में 38.2 प्रतिशत आबादी गरीब थी जो 2011-12 में घटकर 29.5 प्रतिशत पर आ गई. इसके विपरीत तेंदुलकर समिति ने कहा था कि 2009-10 में गरीबों की आबादी 29.8 प्रतिशत थी जो 2011-12 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गई. रंगराजन समिति के इस रिपोर्ट के अस्तित्व में आ जाने से वर्ष 2011-12 में ही देश में गरीबों की संख्या में 7.6 फीसदी का इजाफा हो गये है.

हालांकि, तेंदुलकर समिति तथा रंगराजन समिति की रिपोर्टे गरीबी की रेखा को तय करने के लिये प्रस्तुत की गई है जिनका सरकारी योजनाओं में उपयोग किया जाता है. इससे पहले तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट से यूपीए सरकार तथा योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह की बहुत फजीहत हुई थी. उस समय ारोप लगे थे कि तेंदुलकर समिति ने गरीबी की रेखा को नीचे करके गरीबी की संख्या को कम करके पेश किया था.

अब रंगराजन समिति ने उस गरीबी के जिन्न को फिर से बहसों में ला दिया है वह भी ऐन उस वक्त जब मोदी सरकार का प्रथम बजट 10 जुलाई को पेश होने वाला है.

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