रंगरसिया के रस

रायपुर | संवाददाता: फिल्म रंगरसिया की समीक्षा करते हुये यह बात भूला दी जा रही है कि यह फिल्म उस चित्रकार राजा रवि वर्मा के बारे में है, जिन्होंने भारतीय देवी-देवताओं की पहले-पहल शानदार तस्वीरें बनाई. ये और बात है कि यह फिल्म एडल्ट की श्रेणी में है और फिल्म को केवल व्यस्क ही देख पायेंगे. यह बात भी बहुत कम लोगों को मालूम होगी कि दादा साहेब फाल्के ने जब अपनी पहली फिल्म बनाई तो उसके लिये राजा रवि वर्मा ने ही पैसे दिये थे.

केरल के किलिमानूर के राजा रवि वर्मा समाज की दिशा से अलग हट कर चलने के लिये मशहूर थे. अपनी प्रेमिकाओं की न्यूड पेंटिंग बनाई, सौंदर्य को उकेरने की कोशिश की. अश्लीलता का आरोप लगा और राजा रवि वर्मा को अदालत तक पहुंचना पड़ा.


फिलहाल फिल्म की बात करें तो केतन मेहता ने इस फिल्म में अपना श्रेष्ठ काम पेश किया है. फिल्म बनते-बनते कई साल लग गये. रणदीप हुड्डा और नंदना सेन का अभिनय चौंकाने की हद तक पसंद आता है. फिल्म में कैमरा और लाइट्स प्रभावित करता है. कुछ उत्तेजक दृश्य भी हैं लेकिन राजा रवि वर्मा के किरदार के साथ ऐसा नहीं होता तो भला किस कमबख्त के साथ ऐसा होना चाहिये. हां, आप ये ज़रुर कह सकते हैं कि केतन मेहता ने रवि वर्मा के नाम पर कुछ ज्यादा ही छूट ले ली है. फिल्म की कहानी, संगीत, गीत सबकुछ बेहतर बन पड़ा है. इस फिल्म को अगर आप नहीं देखेंगे तो कुछ गलती करेंगे.

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