राव और तेंदुलकर को भारत रत्न

नई दिल्ली | संवाददाता: भारत के शीर्ष वैज्ञानिक सीएनआर राव और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में लगभग 3 मिनट तक चले कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इन दोनों को भारत रत्न से अलंकृत किया.

राव और तेंदुलकर को देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण भी मिल चुका है. इस तरह वे भारत रत्न से सम्मानित 41 व्यक्तियों की सूची में शामिल हो जाएंगे, जिन्हें 1954 से शुरू हुए इस सम्मान से नवाजा गया है.

बीबीसी के अनुसार रसायन शास्त्र की गहरी जानकारी रखने वाले राव फ़िलहाल बंगलौर स्थित जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिचर्स में कार्यरत हैं. मुंहफट छवि वाले प्रोफ़ेसर चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव, जाने माने वैज्ञानिक सीवी रमन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के बाद तीसरे वैज्ञानिक हैं जिन्हें भारत रत्न प्रदान किया जाएगा.

दुनियाभर की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाएं, रसायन शास्त्र के क्षेत्र में उनकी मेधा का लोहा मानती हैं. वे दुनियाभर के उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में से एक हैं जो तमाम प्रमुख वैज्ञानिक शोध संस्थाओं के सदस्य हैं.

बीते पांच दशकों में राव ‘सॉलिड स्टेट’ और ‘मटेरियल कैमिस्ट्री’ पर 45 किताबें लिख चुके हैं और इन्हीं विषयों पर उनके 1400 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं.

वैज्ञानिकों की जमात मानती है कि राव की उपलब्धियां, सचिन के सौ अंतरराष्ट्रीय शतकों के बराबर हैं.

बैंगलोर में 30 जून 1934 को जन्में इस वैज्ञानिक ने ‘नैनो मटेरियल’ और ‘हाइब्रिड मटेरियल’ के क्षेत्र में भी गहन योगदान दिया है. राव की मेधा और लगन का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके साथ काम करने वाले अधिकतर वैज्ञानिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन वे 79 साल की उम्र में भी सक्रिय हैं और प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद में अध्यक्ष के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

विज्ञान के क्षेत्र में भारत की नीतियों को गढ़ने में अहम भूमिका निभाने वाले राव, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के भी सदस्य थे. इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री राजीव गांधी, एचडी दैवेगोड़ा, और आईके गुजराल के कार्यकाल में परिषद के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया था.

अमरीका से अपनी डॉक्टरेट की उपाधि लेने के बाद राव ने कैलिफोर्निया और बर्कले यूनिवर्सिटी में रिसर्च एसोसिएट की हैसियत से काम किया और वर्ष 1959 में भारत लौटकर बंगलौर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में काम करना शुरू किया.इसके बाद वे आईआईटी कानपुर चले गए लेकिन वर्ष 1959 में दोबारा बंगलौर आ गए जहां उन्होंने मटेरियल साइंस सेंटर और सॉलिड स्टेट कैमिकल यूनिट स्थापित की थी. उनकी इस पहल को वैज्ञानिक जगत में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है.

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