बाजार को निराश किया राजन ने

मुंबई | एजेंसी: बाजार के उम्मीद के विपरीत आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की है. इसकी घोषणा रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने की है. भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को पांचवीं दुमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. रिजर्व बैंक ने रेपो दर को आठ फीसदी पर और रिवर्स रेपो दर को सात फीसदी पर ही रख छोड़ा.

नकद आरक्षी अनुपात को चार फीसदी पर पर बरकरार रखा गया. सीमांत स्थायी सुविधा और बैंक दर को भी नौ फीसदी पर रख छोड़ा गया. सांविधिक तरलता अनुपात को भी 22 फीसदी पर बनाए रखा गया.


आर्थिक स्थिति और हालिया आंकड़े को देखते हुए अधिकतर विश्लेषकों का भी यही अनुमान था कि प्रमुख दरों में बदलाव नहीं किए जाएंगे.

ब्याज दर कटौती का था बाजार को इंतजार
उद्योग जगत को यह भी उम्मीद थी कि सोमवार को जब रिजर्व बैंक के गवर्नर से केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की मुलाकात होगी, तो जेटली यह कोशिश करेंगे कि राजन कटौती के लिए तैयार हो जाएं.

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को इस मुलाकात के बारे में जेटली की ओर इशारा करते हुए कहा था, “रिजर्व बैंक के गवर्नर को मनाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कीजिए, क्योंकि कटौती जरूरी है.”

शुक्रवार को जारी आंकड़े के मुताबिक दूसरी तिमाही में देश की विकास दर घट कर 5.3 फीसदी रही, जो प्रथम तिमाही में 5.7 फीसदी थी. यही नहीं विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह दर 0.1 फीसदी दर्ज की गई.

विनिर्माण क्षेत्र में विकास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मेक इन इंडिया’ अभियान चला रहे हैं.

देश की उपभोक्ता महंगाई दर भी अक्टूबर में रिकार्ड निचले स्तर 5.52 फीसदी पर दर्ज की गई, जो एक साल पहले 10.17 फीसदी थी. थोक महंगाई दर भी 1.77 फीसदी दर्ज की गई, जो एक महीने पहले 2.38 फीसदी थी.

यह दरों में कटौती करने के लिए एक अनुकूल स्थिति थी.

अभी बैंक दर नौ फीसदी है. यह वह दर है, जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है.

रेपो दर आठ फीसदी है. यह वह दर होती है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक लघु अवधि के लिए रिजर्व बैंक से ऋण लेते हैं.

रिवर्स रेपो दर सात फीसदी है. यह वह दर है, जो वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अतिरिक्त राशि सुरक्षित रखने पर रिजर्व बैंक देता है.

भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने सोमवार को कहा, “रिजर्व बैंक को यथास्थिति की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और खपत बढ़ाकर तथा निवेश के अवसर बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को सहारा देना चाहिए.”

बहरहाल, ब्याज दरों में कटौती न करके उसे यतावत रखने के आरबीआई के फैसले से बाजार निराश है.

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