आरबीआई ने अपरिवर्तित रखी दरें

मुंबई | एजेंसी : भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के आर्थिक स्थिति के मद्देनजर मंगलवार को अपनी मुख्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नही करने का निर्णय लिया है. चालू वर्ष की पहली तिमाही में रिपर्चेज दर या रेपो दर को 7.25 फीसदी पर बरकरार रखा जायेगा इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर भी 6.25 फीसदी के पुराने स्तर पर बनी रहेगी.

भारतीय रिजर्व बैंक ने यह निर्णय रुपयों के अवमूल्यन को देखते हुए लिया है. इसके साथ ही बैंक ने स्वीकार किया कि विकास के सामने जोखिम में वृद्धि हुई है और खुदरा बाजार में महंगाई उच्च स्तर पर बरकरार है.

ज्ञात्वय रहे कि कमर्शियल बैंकों को जब कभी फंड की कमी हो जाती है या कोई और शॉर्ट टर्म जरूरत होती है तो वे केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कैश उधार ले सकते हैं. रिजर्व बैंक जब इन बैंकों को पैसा उधार देता है, तो कैश के बदले बैंकों से कुछ सिक्योरिटीज चाहता है, ताकि अगर भविष्य में कोई रिस्क हो तो इन सिक्युरिटीज से उसे पूरा किया जा सके. ऐसे में बैंक अपनी कुछ सिक्युरिटीज (आमतौर पर इनमें बॉन्ड्स शामिल होते हैं) रिजर्व बैंक को इस शर्त के साथ बेच देते हैं कि पहले से तय किए गए समय पर वे अपनी सिक्युरिटीज को वापस खरीद लेंगे.

बैंक इस तरह रिजर्व बैंक से जो पैसा उधार लेते हैं, उस पर रिजर्व बैंक उनसे कुछ ब्याज भी वसूलता है. जिस दर पर यह ब्याज वसूला जाता है, उसे ही रेपो रेट कहते हैं. जब कभी रिजर्व बैंक रेपो रेट में कमी कर देता है तो कमर्शल बैंकों को रिजर्व बैंक से कर्ज मिलने मे आसानी हो जाती है और जब रेपो रेट को बढ़ा दिया जाता है, तो रिजर्व बैंक द्वारा दिया जाने वाला कर्ज महंगा हो जाता है.

रिवर्स रेपो रेट: रिवर्स रेपो वह रेट है, जिस पर दूसरे बैंक रिजर्व बैंक को पैसा उधार देते हैं. जब कभी बैंकिंग सिस्टम में कैश का फ्लो ज्यादा होता है तो कर्मशल बैंक ये पैसा रिजर्व बैंक को उधार दे देते हैं. इसके बदले में रिजर्व बैंक भी अपनी सिक्युरिटीज को बैंक के पास रखता है और उस पैसे पर ब्याज अदा करता है. कमर्शल बैंकों से उधार ली गई रकम पर जिस दर से रिजर्व बैंक ब्याज अदा करता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है.

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