छत्तीसगढ़ में शिशु मृत्यु दर घटी

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण शिशु मृत्यु-दर में काफी गिरावाट आयी है. उल्लेखनीय है कि किसी देश या राज्य में शिशु मृत्यु दर से भी वह पैमाना है जिसके आधार पर वहां के स्वास्थ्य सेवाओं की रेटिंग तय की जाती है. केन्द्र सरकार, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम द्वारा जून 2016 में प्रकाशित बुलेटिन के अनुसार राज्य में शिशु मृत्यु-दर प्रति 1 हजार जीवित जन्म पर 43 हो गयी है. पहले राज्य में 1 हजार जीवित जन्म पर 46 थी. इस प्रकार शिशु मृत्यु- दर में कमी दर्ज की गई है.

छत्तीसगढ़ के संचालक स्वास्थ्य सेवाएं आर प्रसन्ना ने कहा कि वर्ष 2016-17 में शिशु मृत्यु-दर 38, वर्ष 2017-18 में 32 और वर्ष 2018-19 में प्रति 1 हजार जीवित जन्म पर 25 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. संचालक स्वास्थ्य सेवाएं प्रसन्ना ने कहा कि अन्य राज्यों जैसे- मध्यप्रदेश में 52, असम और उड़ीसा में 49, उत्तरप्रदेश में 48, तथा राजस्थान और मेघालय में 46 शिशु मृत्यु-दर दर्ज की गई है. छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 43 है जो इन राज्यों से बेहतर स्थिति में है.

छत्तीसगढ़ के संचालक स्वास्थ्य सेवाएं प्रसन्ना ने कहा कि राज्य में शिशु मृत्यु दर में कमी होने के प्रमुख कारण संस्थागत प्रसव का बढ़ना, स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट का संचालन व न्यूबॉर्न स्टेपलाईजेशन यूनिट, न्यूबॉर्न केयर कॉर्नर का संचालन तथा बच्चों का नियमित टीकाकरण है. एस.एन.सी.यू. में बीमार नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य में 13 एस.एन.सी.यू. क्रियाशील है, गंभीर रूप से पीड़ित बच्चों को बचाया जा रहा है.

इसी प्रकार एन.बी.एस.यू. में बीमार व कम वजन के बच्चों का स्थरीकरण किया जा रहा है तथा पीलिया से बचाव हेतु फोटोथेरेपी दी जा रही है.

प्रत्येक डिलीवरी संस्थान में नवजात की देखभाल हेतु एन.बी.सी.सी. स्थापित कर नवजात को प्रथम दिवस पर आवश्यक देखभाव व पुनर्जीवन प्रदाय किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में नियमित टीकाकरण के माध्यम से जानलेवा बीमारियों से बचाव हेतु प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जा रही है. स्वास्थ्य संस्थाओं में कम वजन के बच्चों के लिये कंगारू मदर केयर भी प्रदाय किया जा रहा है जिसमें समय पूर्व होने वाले बच्चों को मां के सीने से लगाकर गर्माहट प्रदान की जाती है. आगामी वर्षों में भी इन संस्थानों में शिशु मृत्यु दर समीक्षा क्रियान्वित कर शिशु मृत्यु दर और कम किया जाएगा.


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