अकेले भाषण देते रहे राज्यपाल

आइजोल | संवाददाता : गणतंत्र दिवस समारोह में मिजोरम में आम नागरिकों के शामिल नहीं होने को लेकर अब बहस शुरु हो गई है. सरकार का कहना है कि मामला मौसम की खराबी से जुड़ा हुआ है, जबकि विपक्षी दल इसे नागरिकता (संशोधन) विधेयक से जोड़ कर देख रहे हैं.

गणतंत्र दिवस के मौके पर शनिवार को मिजोरम की राजधानी आइजोल में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था लेकिन इसमें कोई भी आम नागरिक शामिल नहीं हुआ. इस दौरान मिजोरम के राज्यपाल कुम्मानम राजशेखरन का जब भाषण हुआ तो उनके सामने का पूरा मैदान तकरीबन खाली था. राज्यपाल का भाषण जिस समय चल रहा था, तब मैदान में थोड़े बहुत जो लोग थे, वे सरकारी अधिकारी भर थे.


मिजोरम में भी नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर बीते कुछ समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है. इसी के तहत बीते दिनों यहां के तमाम नागरिक अधिकार समूहों के एक संगठन एनजीओ कोऑर्डिनेशन कमेटी ने गणतंत्र दिवस समारोहों के बहिष्कार का आह्वान किया था. यही वजह है कि गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में कोई आम नागरिक शामिल नहीं हुआ और राज्यपाल को अकेले भाषण देना पड़ा.

इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री, विधायक और सिर्फ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हुए थे. इसके अलावा जिला और ब्लॉक स्तर पर भी आम लोगों ने गणतंत्र दिवस समारोहों में कोई भागीदारी नहीं की. बताया जा रहा है कि इस दौरान कई जगहों पर लोगों ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया.

यंग मिजो एसोसिएशन के अध्यक्ष वनलारुता ने कहा कि हमारा पहला एजेंडा गणतंत्र दिवस का बहिष्कार करना है, लेकिन यदि नागरिकता विधेयक पारित हो जाता है, तो हम एक साथ बैठेंगे और अपनी अगली कार्रवाई पर काम करेंगे.

इससे पहले 23 जनवरी को एक छात्र संगठन मिज़ो ज़िरलाई पावल द्वारा एक सार्वजनिक रैली बुलाई गई थी, जहाँ बिल के विरोध में संगठन के अध्यक्ष रामदीनलिया रेंटहेली ने घोषणा की कि वे केंद्र सरकार के विधेयक को पारित करने के बाद मिजोरम की आज़ादी के लिए लड़ने के लिये तैयार हैं.

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