आतंकवाद बस आतंकवाद है: राजनाथ

इस्लामाबाद | समाचार डेस्क: दक्षेश सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने कहा आतंकवाद बस आतंकवाद है. उसका किसी भी तरह से महिमामंडन गलत है. उन्होंने कहा कि आतंकवादियों का शहीदों की तरह महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिये. पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां गुरुवार को आतंकवाद और इसका समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया. साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकवादियों का ‘शहीदों’ की तरह महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए. दक्षेस के गृह मंत्रियों की बैठक में राजनाथ ने कहा, “आतंकवाद का महिमामंडन न हो और इसे किसी भी राष्ट्र द्वारा संरक्षण न मिले, यह सुनिश्चित करने की जरूरत है. किसी देश का आतंकवादी किसी अन्य राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता सेनानी या शहीद नहीं हो सकता.”

उन्होंने कहा, “जो आतंकवाद या आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराते हैं या किसी भी प्रकार की सहायता करते हैं, उन्हें अलग-थलग करना चाहिए. इस बुराई के खात्मे के लिए हमें अपने संकल्पों को मजबूत करना चाहिए, इसे खत्म करने के लिए गंभीर उपाय करने चाहिए.”


अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी आलोचनाओं के निशाने पर निश्चित तौर पर पाकिस्तान सरकार थी.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में मारे गए हिजबुल आतंकी बुरहान वानी को ‘शहीद’ करार दिया था. उन्होंने कहा था कि वह जम्मू एवं कश्मीर की ‘आजादी’ के लिए शहीद हो गया.

आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के विरोध में पाकिस्तान सरकार ने काला दिवस भी मनाया था.

राजनाथ ने कहा, “केवल आतंकवादियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि इसका समर्थन करने वाले संगठनों, व्यक्तियों तथा देशों के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.”

उन्होंने कहा, “आतंकवादी अच्छे और खराब नहीं होते. आतंकवाद बस आतंकवाद है. आतंकवादियों का शहीदों की तरह महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए.”

गृह मंत्री ने कहा, “किसी भी आधार पर आतंकवाद के किसी भी प्रकार या उसके समर्थन को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता. ऐसे लोगों पर तत्काल व प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है, जो किसी भी तरीके से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं, चाहे वे सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े हों या सत्ता प्रतिष्ठान से स्वतंत्र हों.”

पाकिस्तानी सरजमीं पर भारत के गृह मंत्री का आतंकवाद के खिलाफ यह संदेश कश्मीर घाटी में अशांति के बीच आया है, जिसका आरोप भारत ने पाकिस्तान पर लगाया है. वानी की मौत के बाद घाटी में हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों व प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में 50 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

घाटी में अशांति से दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच संबंध बिगड़े हैं, खासकर पाकिस्तान के कश्मीर अलाप के बाद, जिसमें राजनयिकों से कश्मीर मामले को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपील की गई है.

इस साल जनवरी में पठानकोट में भारती वायु सेना के अड्डे पर आतंकवादी हमले के बाद किसी भारतीय मंत्री की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है. इस हमले का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर लगाया है.

यूनाइटेड जेहाद काउंसिल सहित कई आतंकवादी संगठनों द्वारा आयोजित भारत विरोधी प्रदर्शनों के बीच राजनाथ सिंह बुधवार शाम यहां पहुंचे.

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड तथा लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद ने भी लाहौर में भारत विरोधी रैली की और राजनाथ के इस्लामाबाद की सरजमीं पर कदम रखने के खिलाफ पाकिस्तान सरकार की आलोचना की.

आतंकवादी संगठनों से खतरों के मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्री को एक हेलीकॉप्टर से उनके होटल तक ले जाया गया और राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा दी गई.

पाकिस्तान 9-10 नवंबर को दक्षेस शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी कर रहा है, जिसमें सदस्य देशों के प्रधानमंत्रियोंतथा राष्ट्रपतियों के शिरकत करने की संभावना है.

राजनाथ सिंह ने अपने समापन भाषण में कहा, “कुछ ही महीनों में क्षेत्र के नेता 19वें दक्षेस शिखर सम्मेलन के लिए इस्लामाबाद में जुटेंगे. मैं उम्मीद करता हूं कि इस दौरान हम परस्पर चिंता तथा हितों के क्षेत्रों में ठोस प्रगति का प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे. हमारे लिए यह काम करने का समय है.”

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