‘एक शहीद को बख्श दो’

मुंबई | समाचार डेस्क: एनआईए द्वारा मालेगांव ब्लॉस्ट के आरोपियों को क्लीन चिट दे दिया गया है. इसी के साथ एनआईए के द्वारा दायर पूरक चार्जशीट पर सवाल उठने लगे हैं. मिली जानकारी के अनुसार नये पूरक चार्जशीट में कहा गया है कि कर्नल पुरोहित के यहां एटीएस ने ही विस्पोटक रखवाया था. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने इस पर कहा है कि एक शहीद को तो बख्श दो. उल्लेखनीय है कि मुंबई हमलें में शहीद हुये हेमंत करकरे उस एटीएस के मुखिया थे जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सहित अन्य को मालेगांव ब्लॉस्ट का आरोपी बनाया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को मालेगांव विस्फोट मामले में प्रमुख आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और पांच अन्य को क्लीन चिट दे दिया और इनके नाम आरोपियों की सूची से हटा दिया.

इसके बाद इनकी जेल से जल्द रिहाई का रास्ता साफ हो गया है. सितंबर, 2008 में महाराष्ट्र के इस मुस्लिम बहुल शहर में तथाकथित ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया था, जिसके ज्यादातर आरोपियों का संबंध हिंदुत्ववादी संगठनों से था.


एनआईए ने एक विशेष अदालत के समक्ष दायर पूरक आरोपपत्र में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप हटाने का फैसला किया है.

इस मामले में साध्वी प्रज्ञा, शिवनारायण कालसांगरा, श्याम भंवरलाल साहू, लोकेश शर्मा, प्रवीण तक्कालकी उर्फ मुतालिक, लोकेश शर्मा और धान सिंह चौधरी को क्लीन चिट दी गई है.

एजेंसी ने कहा, “जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं और एनआईए ने अपनी अंतिम रपट में कहा है कि उनके खिलाफ अभियोजन बनाए नहीं रखा जा सकता है.” एजेंसी ने कहा कि इनमें से किसी के खिलाफ भी मकोका के तहत कोई मामला नहीं पाया गया.

साध्वी के वकील संजीव पुणालेकर ने कहा कि एनआईए ने पर्याप्त सबूतों के अभाव के कारण मकोका के तहत उनके खिलाफ सभी आरोप हटाने का फैसला किया है.

पुणालेकर ने कहा, “इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ आरोप हटा लिए गए हैं, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया जा रहा है.”

उन्होंने एनआईए अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा कि इन छह आरोपियों को जल्द ही जेल से रिहा किया जा सकता है.

इस बीच कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एनआईए और भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर आतंकवादियों को बचाने का आरोप लगाया. उन्होंने हेमंत करकरे की जांच को अवैध ठहराने के लिए भी एनआईए की निंदा की.

दिग्विजय ने कहा, “वे कह रहे हैं कि करकरे ने एक गलत रपट दायर की थी. हमें पता है कि आप आरोपियों को बचाना चाहते हैं और हमें यह भी पता है कि आपके संबंध उन लोगों से हैं, जो इस आतंकवादी गतिविधि में शामिल हैं. उन्हें कम से कम एक शहीद को तो बख्श देना चाहिए था.”

लेकिन सरकार ने मामले की जांच में किसी राजनीतिक हस्तक्षेप से इंकार किया है.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “कानून स्वाभाविक रूप से अपना काम कर रहा है. जांचकर्ताओं के पास अब पूर्व की सरकार के विपरीत बगैर किसी दबाव के जांच करने की आजादी है.”

उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर, 2008 को नासिक जिले के मालेगांव शहर में एक मोटरसाइकिल में रखे गए शक्तिशाली बम में विस्फोट हो गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी और 80 अन्य घायल हो गए थे.

बाद में इसे अज्ञात ‘हिंदू चरमपंथियों’ द्वारा अंजाम दिया गया पहला आतंकी मामला बताया गया था. इस मामले की जांच पहले पुलिस और फिर राज्य के आतंकवाद रोधी दस्ते ने की थी. अंत में इसे एनआईए को सौंप दिया गया था.

इस मामले की जांच पहले तत्कालीन एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे कर रहे थे. लेकिन 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में करकरे शहीद हो गए थे. करकरे के नेतृत्व वाली एटीएस ने मामले में साध्वी प्रज्ञा समेत 14 लोगों को आरोपी बनाया था.

दो अन्य लोगों रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे को ‘फरार’ बताया गया था. ये दोनों 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में भी आरोपी हैं.

एनआईए ने भी आरोपियों के खिलाफ आरोप हटाने से पहले हाल में इन्हीं 14 लोगों को आरोपियों की सूची में दिखाया था. (एजेंसी इनपुट के आधार पर)

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