लेखक के.पी. सक्सेना नही रहे

लखनऊ | एजेंसी: पद्मश्री से सम्मानित मशहूर लेखक एवं व्यंग्यकार के. पी. सक्सेना का गुरुवार को लखनऊ में निधन हो गया. वह कैंसर से पीड़ित थे. ‘स्वदेश’, ‘लगान’, ‘हलचल’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्मों की पटकथा और संवाद लिखने वाले सक्सेना ने गुरुवार सुबह लगभग 8.30 बजे लखनऊ के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उन्हें 31 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

सक्सेना के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि सक्सेना के चले जाने से हिन्दी साहित्य जगत और विशेष रूप से हास्य-व्यंग्य विधा को अपूरणीय क्षति पहुंची है.

पद्मश्री सम्मान से विभूषित सक्सेना लखनवी तहजीब एवं संस्कृति के प्रबल समर्थक थे. उन्होंने फिल्मों के लिए पटकथाएं लिखकर फिल्म जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई. उन्हें अच्छी पटकथा लिखने के लिए फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकित भी किया गया था.

सन 1931 में लखनऊ में जन्मे के.पी. सक्सेना की गिनती देश के सबसे बड़े व्यंग्यकारों में होती थी. हरिशंकर परसाई और शरद जोशी के बाद वे हिन्दी में सबसे ज्यादा पहचाने गए व्यंग्यकार थे, जिन्होने लखनऊ के मध्यवर्गीय जीवन के इर्द-गिर्द अपनी रचनाएं बुनीं.

के.पी. साहब के रचना कर्म की शुरूआत उर्दू में अफसानानिगारी के साथ हुई थी लेकिन बाद में अपने गुरू अमृत लाल नागर के कहने और आशीर्वाद पाने पर वे व्यंग्य के क्षेत्र में आ गए. नागर साहब की शैली और आशीर्वाद दोनों ने के.पी. साहब के वयंग्य में खूब असर पैदा किया.

उनकी लोकप्रियता इस कदर बढ़ी कि उनके तकरीबन पन्द्रह हजार प्रकाशित व्यंग्य हैं जो कि अपने आप में एक दुर्लभ कीर्तिमान है. उनकी पांच से ज्यादा फुटकर वयंग्य की पुस्तकें प्रकाशित हैं जबकि कुछ व्यंग्य उपन्यास भी छप चुके हैं.

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