फसलों को नष्ट होने से रोके

बलिया | एजेंसी: देश में प्रति वर्ष 13 लाख पांच हजार करोड़ मूल्य के फसलों की क्षति पहुंचाई जाती है. जिसमें कीड़ों से 22 प्रतिशत, रोगों से 29 प्रतिशत तथा खर पतवार से 37 प्रतिशत की हानि होती है.

इन नाशकों द्वारा धान की फसल को भी भारी क्षति पहुंचायी जाती है. यदि किसान रसायनों की मदद से खर पतवार को नियंत्रित कर लें तो इस हानि को रोका जा सकता है.

कृषि विशेषज्ञ एसएन सिंह के मुताबिक खर पतवार भूमि से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम तथा मैगन्शियम आदि तत्वों का ग्रहण कर फसलों को प्रभावित करते हैं. यह खर पतवार हानिकारक कीड़ों और रोगों को भी आश्रय देते हैं जो फसलों के लिए नुकसानदायक होते हैं. वह बताते हैं कि खरीफ की प्रमुख फसल धान में निराई करके खर पतवारों का नियंत्रण करना एक पारंपरिक विधि है जिससे समय एवं श्रम अधिक लगता है.

उन्होंने कहा कि रसायनों द्वारा खर पतवार प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है जो आर्थिक और समय की दृष्टि से काफी लाभदायक है. उन्होंने बताया कि धान की नर्सरी में खर पतवार नियंत्रण के लिए प्रोटलाक्योर की 12.5 मिली लीटर मात्रा उसके डालने के एक दिन बाद प्रयोग करने का खर पतवार को रोका जा सकता है.

इसी प्रकार रोपाई के दस से 20 दिन के अंदर पाइराजो सल्फयूरान दस प्रतिशत की 100 ग्राम मात्रा तथा 20 से 30 दिन में नामिली गोल्ड की 100 मिली लीटर मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करने से भी फायदा होता है.

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