शाकाहार ठूंसा नहीं जा सकता

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: सर्वोच्य न्यायालय ने कहा है शाकाहार किसी के गले में ठूंसा नहीं जा सकता. न्यायालय ने कबीर के दोहे को दोहराते हुये कहा, कबिरा तेरी झोपड़ी गल कटियन के पास, जो करंगे वो भरंगे, तू क्यों भयो उदास. सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को बम्बई उच्च न्यायालय के उस आदेश में दखल देने से इंकार कर दिया, जिसमें मांस की बिक्री पर पाबंदी लगाने वाले नगरपालिका के आदेश पर रोक लगा दी गई थी. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि शाकाहार को किसी के गले में जबरन ठूंसा नहीं जा सकता.

बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने जैन पर्व पर्यूषण के दौरान मांस की बिक्री पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया था, जिसे उच्च न्यायालय ने रोक दिया.


सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक न्यास की तरफ से दायर याचिका पर विचार करने से इंकार करते हुए कहा कि हमारे बीच सहिष्णुता और सामंजस्य की भावना होनी चाहिए.

अदालत ने जैन समुदाय के श्री तपगछिया आत्म कमल लभदिसुरिश्रवरजी ज्ञानमंदिर न्यास को अनुमति दी कि वह अपनी तमाम बातों को उच्च न्यायालय के सामने रख सकता है और मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह कर सकता है. न्यास ने बम्बई उच्च न्यायालय के 14 सितम्बर, 2015 के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी.

न्यास के वकील मनीष सिंघवी ने इस बात को गलत बताया कि लोगों के खान-पान को नियंत्रित करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि 365 दिन में दो दिन के लिए मांस पर रोक लगाने को अतार्किक नहीं कहा जा सकता.

उन्होंने कहा कि आधा दिन बीत चुका है. अदालत आधे दिन के लिए रोक लगा सकती है. इस पर अदालत ने कहा, “सहिष्णुता और सामंजस्य की भावना होनी चाहिए. जैसे कि कबीर ने इस दोहे में कहा है- कबिरा तेरी झोपड़ी गल कटियन के पास, जो करंगे वो भरंगे, तू क्यों भयो उदास. ”

दुनिया भर में शाकाहार के बढ़ते चलन की ओर इशारा करते हुए अदालत ने सिंघवी से कहा कि इस बात को समझा कर ही बढ़ाया जा सकता है. किसी के गले में ठूंसा नहीं जा सकता.

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