राज्यपाल रामनरेश यादव को नोटिस

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव को नोटिस जारी किया. नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें व्यापम घोटाले से जुड़े फारेस्ट गार्ड भर्ती घोटाले में यादव के कथित रूप से शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें राज्यपाल पद से हटाने की मांग की गई है. नोटिस का जवाब तीन हफ्ते के अंदर देना है. इसे यादव के साथ-साथ केंद्र सरकार के नाम भी जारी किया गया है.

प्रधान न्यायाधीश एच.एल.दत्तू, न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने यादव को नोटिस जारी किया. हालांकि, यादव के वकील एम.एन.कृष्णमणि ने अदालत से कहा था कि यादव को नोटिस नहीं दिया जा सकता क्योंकि उन्हें संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत छूट मिली हुई है.

ग्वालियर के कुछ वकीलों ने याचिका दायर कर शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार को रामनरेश यादव को राज्यपाल के पद से हटाने की संवैधानिक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दे.

याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने अदालत से राज्यपालों को हटाने के बारे में दिशानिर्देश जारी करने का भी आग्रह किया.

सर्वोच्च अदालत ने 9 जुलाई को भी यादव को नोटिस जारी किया था. यह नोटिस उस याचिका पर दिया गया था जिसमें यादव के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था.

प्राथमिकी फारेस्ट गार्ड भर्ती घोटाले के सिलसिले में दर्ज हुई थी. उच्च न्यायालय ने कहा था कि यादव को उनके पद की वजह से छूट मिली हुई है.

इसके खिलाफ दायर याचिका में दलील दी गई कि अनुच्छेद 361 के तहत मिली छूट इस हद तक बिना शर्त की नहीं है कि यह कथित गंभीर अपराध करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की राह की बाधा बन जाए.

याचिका में कहा गया कि राज्यपाल के पद पर बैठे व्यक्ति को ‘संदेह से परे’ होना चाहिए. यह वह व्यक्ति होता है जो उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश नियुक्त करता है, मुख्यमंत्री नियुक्त करता है.

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