छत्तीसगढ़ के लापता बच्चों पर SC सख्त

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के लापता बच्चों की सही संख्या पेश नहीं करने पर सर्वोच्य न्यायालय ने फटकार लगाई. गौरतलब है कि गुरुवार को सर्वोच्य न्यायालय में छत्तीसगढ़ तथा बिहार के लापता बच्चों पर सुनवाई थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक मुख्य सचिव डी.एस. मिश्रा और डीजीपी ए.एन. उपाध्याय से पूछा कि 2011 से 2014 के दौरान जब राज्य में 9400 बच्चे गायब हुए तो केवल 1977 मामलों में ही क्यों अपहरण की रिपोर्ट लिखी गई? इसी के साथ अदालत ने छत्तीसगढ़ के लापता बच्चों के सही आकड़ें के बारे में पूछा है. अदालत ने इसी के साथ ही सर्वोच्य न्यायलय में तथा संसद में पेश लापता बच्चों की संख्या में फर्क पर सफाई पेश करने को कहा है.

छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक मुख्य सचिव डी.एस मिश्रा और डीजीपी ए.एन. उपाध्याय ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया है. इसके तहत 17 निजी प्लेसमेंट एजेंसियों की गतिविधियां रोक दी गई हैं. 380 थानों में बाल कल्याण अधिकारियों की तैनाती की गई है. विभिन्न विभागों के सहयोग से मानव तस्करी की गतिविधियों को रोकने की कोशिश हो रही है.

मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी. अदालत ने उस दिन छत्तीसगढ़ के लापता बच्चों पर सही आकड़ा पेश करने के लिये कहा है. गौरतलब रहे कि सर्वोच्य न्यायालय में नोबल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश शत्यार्थी के बचपन बचाओं आंदोलन के तरफ दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है.


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