एसडी बर्मन शाही परिवार से संगीतकार

मुंबई | मनोरंजन डेस्क: शाही परिवार में पैदा होने के बावजूद भी एसडी बर्मन ने वैभव की जगह संगीत की दुनिया में नाम कमाया. त्रिपुरा के शाही परिवार में जन्मे एसडी बर्मन के पिता जाने-माने सितार वादक तथा गायक थे. एसडी बर्मन का संगीत के प्रति रुझान उनके पिता की देन है. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब दूसरे राजा-महराजा अपने संपदा को संभालने में लगे थे एसडी बर्मन में अपने संगीत को संवारा था. हालांकि, एसडी बर्मन 1944 में ही मुंबई आ गये थे. उनका संगीतकार के रूप में शुरुआती दौर संघर्षपूर्ण रहा परन्तु उन्होंने अपने आवाज तथा संगीत के ज्ञान की बदौलत मुंबई में जगह बना ही ली.

1947 उनके निर्देशन में गीता दत्त के गाये गाने ‘मेरा सुंदर सपना बीत गया’ ने बरबस ही लोगों का ध्यान उनकी तरफ खींचा. संगीत निर्देशन के अलावा बर्मन दा ने कई फिल्मों के लिये गाने भी गाये. इन फिल्मों में ‘सुन मेरे बंधु रे सुन मेरे मितवा मेरे साजन है उस पार’ और ‘अल्लाह मेघ दे छाया दे’ जैसे गीत आज भी श्रोताओं को भाव विभोर करते हैं.

एसडी बर्मन ने फिल्म के कुछ लोकप्रिय गाने हैं जैसे- ‘सुजाता’ का ‘सुन मेरा बंधू रे सुन मेरे मितवा’, ‘बंदिनी’ का ‘ओ मांझी मेरे साजन हैं उस पार मैं इस पार’, ‘गाईड’ का ‘मेघ दे पानी दे छाया दे रे रामा’ तथा ‘वहां कौन है तेरा मुसाफिर जोएगा कहां’, फिल्म ‘आराधना’ का ‘काहे को रोये, सफल होगी तेरी अराधना’.

एसडी बर्मन के लड़के राहुल देव बर्मन ने भी पिता के समान मुंबई में कई फिल्मों में संगीत दिया. एसडी बर्मन का गाया अंतिम गाना फिल्म ‘मिली’ का ‘बड़ी सूनी सूनी है’.


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