16 की उम्र में सेक्स जायज

नयी दिल्ली: यौन हिंसा के खिलाफ लाये गये विधेयक में सहमति से सेक्स की उम्र 16 साल कर दी गई है. महिलाओं के साथ बलात्कार और अन्य अपराधों के लिए कडे दंड का प्रावधान करने वाले विधेयक को आज कैबिनेट की मंजूरी मिल गयी. विधेयक में एसिड हमला, पीछा करने, घूरने और छिपकर ताकझांक करने को आपराधिक कृत्य माना गया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई कैबिनेट की बैठक में विधेयक को मंजूरी दी गयी. विधेयक में सहमति से सेक्स करने की आयु 18 से घटाकर 16 साल करने का प्रावधान है. अध्यादेश में यह आयु 18 साल थी. बलात्कार की पीडिता की मौत होने या उसके कोमा जैसी स्थिति में जाने पर दोषी को मौत की सजा दे सकने का इसमें प्रावधान किया गया है.

आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2013 में बलात्कार को लैंगिकता से जुडा विशिष्ट अपराध माना गया है यानी इसे महिला केन्द्रित बनाया गया है और इसके लिए केवल पुरुषों पर ही आरोप लगेगा. महिलाओं पर अपराध को लेकर पिछले महीने जारी अध्यादेश की जगह यह विधेयक लेगा. अध्यादेश में यौन हमला शब्द का इस्तेमाल किया गया था जो लैंगिकता के लिहाज से अधिक तटस्थ था. विधेयक के मुताबिक बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा 20 साल कारावास है जिसे बढाकर आजीवन कारावास किया जा सकता है.

जिस बिल के मसौदे को कैबिनेट ने मंज़री दी है उसमें ‘स्टॉकिंग’ यानी महिलाओं का पीछा करना और ‘वॉयरिज़्म’ यानी उन्हें छुपकर देखना को भी कानूनन जुर्म बनाने का प्रस्ताव है. स्टॉकिंग को ‘गैर-जमानती जुर्म’ बनाया गया है. इसके अलावा बिल में ‘बलात्कार’ की जगह ‘यौन हिंसा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है जिससे विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बिल ज्यादा महिला प्रधान हो गया है. इसके अलावा झूठी शिकायत पर नियम को भी हटा दिया गया है.

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