शशि कपूर का फिल्मी सफ़रनामा

नई दिल्ली | मनोरंजन डेस्क: शशि कपूर का ‘फिल्मी सफ़रनामा’ एक बाल कलाकार के रूप में हुआ था. 1990 में अभिनय से रिटारमेंट लेने वाले शशि कपूर ने कुल 116 फिल्मों में काम किया जिनमें से ‘आवारा’ तथा ‘दीवार’ को भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर कहा जाता है. बॉलीवुड फिल्मों के रोमांटिक अभिनेता शशि कपूर का चेहरा याद करना हो तो ‘जब जब फूल खिले’ फिल्म का ‘परदेसियों से न अंखियां मिलाना’ और ‘कन्यादान’ फिल्म का ‘लिखे जो खत तुझे’ गीत काफी हैं. जाने-माने फिल्मी घराने कपूर खानदान में जन्मे बलबीर राज कपूर को आज दुनिया शशि कपूर के नाम से जानती है.

18 मार्च, 1938 को कोलकाता में जन्मे शशि कपूर का बुधवार 77 वां जन्मदिन था. शशि अपने जमाने के मशहूर अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे हैं. अभिनेता राज कपूर व शम्मी कपूर उनके बड़े भाई हैं. कलाकारों के परिवार से ताल्लुक रखने के चलते उनमें भी बचपन से ही इस क्षेत्र में कदम रखने का उतावलापन था. उन्होंने परिवार के नक्शेकदम पर चलते हुए फिल्मों में तकदीर आजमाई. हालांकि, उनका करियर पिता व बड़े भाइयों की तुलना में ज्यादा सफल नहीं कहा जा सकता.


40 के दशक में फिल्मों में कदम रखने वाले शशि कपूर ने शुरुआत में कई धार्मिक फिल्मों में बाल कलाकार की भूमिकाएं निभाईं. उन्होंने बंबई के डॉन बोस्को स्कूल से पढ़ाई की. पिता पृथ्वीराज कपूर उन्हें छुट्टियों के दौरान स्टेज पर अभिनय करने के लिए प्रोत्साहित करते थे. इसी का नतीजा रहा कि शशि के बड़े भाई राज कपूर ने उन्हें ‘आग’ और ‘आवारा’ फिल्म में बाल कलाकार की भूमिकाएं दीं. ‘आवारा’ में उन्होंने राज कपूर के बचपन की भूमिका निभाई थी. 50 के दशक में वह एक थिएटर ग्रुप में शामिल हो गए और उसके साथ ही दुनियाभर की यात्राएं कीं. इसी दौरान उन्हें ब्रिटिश अभिनेत्री जेनिफर कैंडल से प्रेम हो गया और 1958 में मात्र 20 वर्ष की उम्र में उनसे शादी कर ली.

शशि ने बतौर मुख्य अभिनेता अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1961 में यश चोपड़ा के निर्देशन की दूसरी फिल्म ‘धर्मपुत्र’ से की. वह एक सफल फिल्म निर्माता भी हैं. बतौर फिल्म निर्माता उन्होंने ‘जुनून’, ‘कलयुग’, ‘विजेता’, ‘उत्सव’, ‘अजूबा’ जैसी फिल्में बनाईं. वह अपने अब तक के फिल्मी करियर में 116 फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं.

‘न्यू दिल्ली टाइम्स’, ‘इन कस्टडी’ और ‘जुनून’ उनके करियर की तीन अतिसफल फिल्में कही जा सकती हैं. इनके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया. 1978 में आई ‘जुनून’ हिंदी की बेहतर फिल्मों में एक है. इसे शशि कपूर ने ही बनाया था, जबकि इसका निर्देशन श्याम बेनेगल ने किया था. यह फिल्म 1957 के भारतीय विद्रोह के इर्दगिर्द घूमती है.

1986 में आई ‘न्यू दिल्ली टाइम्स’ में शशि कपूर और शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिका में थे. फिल्म सफल रही. इसका निर्देशन रोमेश शर्मा ने किया था. यह राजनीतिक दुश्चक्र की फिल्म है. वहीं, ‘इन कस्टडी’ में उनके साथ शाबाना आजमी, ओम पुरी, परीक्षित साहनी, नीना गुप्ता, सुषमा सेठ जैसे कलाकार नजर आए. इसके लिए शशि ने राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता.

वर्ष 2010 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया.

शशि की तबीयत काफी समय से नासाज चल रही है. उन्हें इस बीच कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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