शास्त्रीजी की हत्या हुई थी- पुत्रवधू

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: शास्त्रीजी की पुत्रवधू का दावा है कि उनकी हत्या हुई थी. लाइव हिन्दुस्तान टाइम्स से एक खास बातचीत में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुत्रवधू नीरा शास्त्री ने यह दावा किया है. नीरा शास्त्री का कहना है कि ताशकंद में शास्त्रीजी की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई थी. उऩका पूरा शरीर नीला पड़ गया था तथा बड़े-बड़े चकते पड़ गये थे. जिसे चंदन लगाकर छुपाया गया था.

उल्लेखनीय है कि 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. वह पाकिस्तान के साथ संधि करने वहां गये थे. इस मामले में वहां उनकी सेवा में लगाये गये एक बावर्ची को हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया.

शास्त्रीजी की पुत्रवधू नीरा शास्त्री ने कहा कि चंदन लपेटकर शरीर के चकत्तों को छिपाया गया था. चंदन कौन लपेट रहा था, इसकी तस्वीर भी है. उसका नाम भी मुझे पता है, लेकिन अभी नहीं बताऊंगी. जल्द ही वह समय आ रहा है, जब सच्चाई सामने आयेगी. नीरा रवींद्र भवन में लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में रविवार को पहुंची थी.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शास्त्रीजी की हत्या की बात तब से आज तक की सरकार छुपाती रही है. शास्त्री जी के नाम किसी ने कुछ नहीं किया. हमलोग उनकी हत्या की जांच की मांग लगातार करते रहे, लेकिन केंद्र सरकार ने कुछ नहीं किया. अब भाजपा की सरकार है. अब कोई मजबूरी नहीं है. जल्द ही सारी बातें सामने आ जायेंगी.

दरअसल, भारत पाकिस्तान के बीच 1965 का युद्ध ख़त्म होने के बाद 10 जनवरी 1966 को शास्त्रीजी ने पाकिस्तानी सैन्य शासक जनरल अयूब ख़ान के साथ तत्कालीन सोवियत रूस के ताशकंद शहर में ऐतिहासिक शांति समझौता किया था.

हैरानी वाली बात यह रही कि उसी रात शास्त्री जी का कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. बताया जाता है कि समझौते के बाद लोगों ने शास्त्रीजी को अपने कमरे में बेचैनी से टहलते हुए देखा था.

शास्त्रीजी के साथ ताशकंद गए इंडियन डेलिगेशन के लोगों को भी लगा कि वह परेशान हैं. डेलिगेशन में शामिल शास्त्री जी के इनफॉरमेशन ऑफ़िसर कुलदीप नैय्यर ने लिखा है, “रात में मैं सो रहा था कि किसी ने अचानक दरवाजा खटखटाया. वह कोई रूसी महिला थी. उसने बताया कि आपके पीएम की हालत सीरियस है. मैं जल्दी से उनके कमरे में पहुंचा. वहां एक व्यक्ति ने इशारा किया कि ही इज़ नो मोर. मैंने देखा कि बड़े कमरे में बेड पर एक छोटा-सा आदमी पड़ा था.“

कहा जाता है कि जिस रात शास्त्रीजी की मौत हुई, उस रात खाना उनके निजी सर्वेंट रामनाथ ने नहीं, बल्कि सोवियत में भारतीय राजदूत टीएन कौल के कुक जान मोहम्मद ने बनाया था.

पहले भी शास्त्रीजी के ताशकंद में हुये मृत्यु को लेकर सवाल उठते रहें हैं. नीरा शास्त्री के हालिया दावे से उनकी मौत का रहस्य और गहरा गया है. इसका एक दूसरा पक्ष भी है. कहा जाता है कि उस रात शास्त्रीजी ने भारत फोन करके कहा था कि भारत आकर वे ऐसी बात का खुलासा करेंगे कि लोग सब भूल जायेंगे. उसके दावा किया गया था कि ताशकंद समझौते के समय शास्त्रीजी के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी थे.

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