बुरे दिनों का साथी अच्छे दिनों में ‘कौवा’?

मुंबई | एजेंसी: शिवसेना ने भाजपा की तुलना अपने ‘सामना’ के संपादकीय में कौवे से की है. वहीं, सामना में शिव सैनिकों को महाराष्ट्र का सच्चा संरक्षक बताया है. कल तक जो ‘सामना’ भाजपा के नीतियों का समर्थन करता था आज महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के सीटों के बंटवारे को लेकर उसके खिलाफ आग उगल रहा है. हालांकि, बाला साहेब के दौर से ही ‘सामना’ के माध्यम से शिवसेना अपने विरोधियो पर इस तरह की टिप्पणी करती रही है. गौरतलब है कि शिवसेना ने शुक्रवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ में 25 वर्ष पुराने गठबंधन के साथी भाजपा की तुलना कौए से की है. अखबार के संपादकीय लेख में शिव सेना ने अपने शिवसैनिकों के दम पर खुद को महाराष्ट्र का सच्चा संरक्षक बताया है.

लेख के अनुसार, “हिंदुत्व की समान विचारधारा के आधार पर बना गठबंधन टूट गया. महाराष्ट्र के हित में अंतिम क्षणों तक हमने गठबंधन को बचाने की कोशिश की. महारानी तुलजा भवानी महाराष्ट्र की राह तय करेंगी. लेकिन अगर राज्य पर किसी तरह की आंच आती है, तो इतिहास कभी माफ नहीं करेगा.”


लेख में कहा गया है, “अब पितृ पक्ष खत्म हो चुका है. हर किसी के पूर्वज कौए के रूप में आए, मिठाइयां खाईं और खुशी-खुशी उड़ गए. केवल राजनीतिक वंशज सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर किसी भी समाधान के लिए तैयार नहीं थे.”

संपादकीय के मुताबिक, “पितृ पक्ष का कौआ उड़ चुका है. अब केवल योद्धा बचे हैं. लोग जल्द ही अंतर देखेंगे.” जाहिर सी बात है कि भाजपा से गठबंधन टूट जाने से शिवसेना के लिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पद पर उद्धव ठाकरे को देखने की आशा अब धूमिल हो गई है. इससे उनका अपने कल तक के साथी भाजपा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किये जाने से साफ है कि इस बार के महाराष्ट्र के विधानसभा के चुनाव में प्रचार का स्तर क्या रहने वाला है.

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