संत का सवाल, आपका धन सफेद या काला

डौंडियाखेड़ा | एजेंसी: संत शोभन सरकार ने नरेन्द्र मोदी से सवाल किया है कि अटल बिहारी के समय विदेशो से काला धन क्यों नही वापस लाया गया था.

मोदी को संत शोभन सरकार के ओर से भेजी गई चिठ्ठी में कहा गया है कि ‘आपकी सरकार अटलजी के नेतृत्व में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है. तब आपकी सरकार काला धन स्विस बैंक से क्यों नहीं ला पाई? मोदी जी एक सवाल और आपकी पार्टी आपकी ब्रांडिंग करने के लिए जितना धन प्रतिदिन खर्च कर रही है वो काला है या सफेद? क्या आप बताने की कृपा करेंगे? आप मीडिया की नजरों में देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखे जा रहे हैं. आम जनता और देश का संत समाज कुछ बिंदुओं पर आपका नजरिया जानना चाहता है.’

गौर तलब है कि मोदी ने चेन्नई की सभा में मोदी ने कहा था कि सुने के आधार पर खुदाई प्रारंभ कर दी गई है विदेशो से काला धन वापस क्यों नही लाया जाता है. वहीं उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिला स्थित डौंडियाखेड़ा गांव में राजा राव रामबख्श सिंह के किले में खजाना दबे होने की उम्मीद क्षीण होते देख लोगों की दिलचस्पी कम हो गई है. हजार टन सोने की चमक देखने के लिए पहुंचने वाला लोगों का मजमा अब खुदाई के तीन दिन बीतने पर नदारद है. भीड़ के नाम पर अब केवल सुरक्षकर्मी और मीडियाकर्मी ही बचे हैं.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 18 अक्टूबर को राजा राव रामबख्श सिंह के खंडहरनुमा किले की खुदाई करने की खबर सामने आने से लोगों के मन में उत्सुकता बढ़ने लगी थी. किले पर लोगों का जमावड़ा लगने लगा. प्रशासन ने सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी.

खुदाई होने के एक दिन पहले से डौंडियाखेड़ा में मेला लग गया. देश-विदेश से मीडियाकर्मी पल-पल की खबर देने के लिए पहुंच गए. आसपास के सैकड़ों लोगों के अलावा पड़ोस के लखनऊ, रायबरेली, फतेहपुर, कानपुर, बांदा, सुल्तानपुर जिलों के लोग भी सोने की चमक देखने पहुंच गए. खंडहर में बाजार सज गया.

चाय, पूरी-सब्जी, कचौड़ी, जलेबी, मूंगफली, छोला चावल के ठेले लग गए. दुकानदारों को खजाने की खोज के मेले में सैकड़ों ग्राहक मिल गए. इन ठेले वाले दुकानदारों के बीच जानी मानी एक वाहन कंपनी ने तो ओपेन एयर शोरूम भी खोल दिया.

सोना देखने पहुंचे लोगों को मायूसी का पहला झटका तब लगा जब खुदाई के पहले दिन बीतने के बाद एएसआई द्वारा यह कहा गया कि खुदाई में एक महीने से ज्यादा समय लगेगा. दिलचस्पी तब और कम हो गई जब खुदाई के तीन दिन बीतने के बाद तक न तो सोना मिला और न ही सोने मिलने की संभावना नजर आई.

किले पर लगा मेला हट चुका है. भीड़ के नाम पर किले पर मीडियाकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के अलावा इक्का-दुक्का दुकानें और कुछ लोग ही बचे हैं, जो डौंडियाखेड़ा या आसपास के गांव के रहने वाले हैं और उन्हें अभी भी यकीन है कि बाबा शोभन सरकार का सपना झूठा साबित नहीं होगा.

जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सर्वानंद सिंह ने कहा कि किले पर जिला पुलिस और पीएसी के करीब 175 जवान, लगभग 50 मीडियाकर्मी और एएसआई के 20 से अधिक अधिकारी और श्रमिक हैं. अब भीड़ के नाम पर चंद बाहरी लोग ही बचे हैं.

बहरहाल संत शोभन सरकार के चिठ्ठी के पश्चात् नरेन्द्र मोदी का स्वर नरम पड़ा है तथा उन्होंने इस मुद्दे पर ट्वीट भी किया है.

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