त्वचारोग संबंधी भ्रांतियां दूर की जायेगी

बेंगलुरू | एजेंसी: यहां की त्वचा विज्ञान अकादमी ने त्वचारोग में विशिष्टता रखने वाले अपने अस्पताल में टेली-डर्मेटोलॉजी के साथ त्वचा संबंधी अनुसंधान सुविधा की शुरुआत की है, त्वचा संबंधी विभिन्न रोगों जैसे सफेद दाग, कुष्ठरोग, विटिलिगो और मुहांसे से जुड़ी भ्रांतियों से लड़ा जा सके. अकादमी के प्रमुख त्वचारोग विशेषज्ञ बी.एस. चंद्रशेखर ने यहां शुभारंभ के मौके पर बताया, “हम जिले के अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को टेली-त्वचाविज्ञान सुविधा से जोड़ने और कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में त्वचारोग पीड़ितों का उपचार करने के लिए उपग्रह-आधारित संचार नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं.”

टेली-त्वचाविज्ञान परियोजना के जरिए असहायों की मदद की जा रही है. यह अस्पताल लोगों, खासकार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों को त्वचा रोगों के बारे में जागरूक करेगा. अस्पताल लोगों को बताएगा कि कुष्ठरोग और मुहांसे जैसे त्वचारोग संक्रामक नहीं होते, इसलिए उनसे डरने की जरूरत नहीं है.

चंद्रशेखर ने समझाया, “कुष्ठरोग शुष्क त्वचा में होने वाली एक खाज है. यह आनुवंशिक होती है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी से होती है. इस बीमारी के चलते त्वचा कोशिकाएं बेहद तेजी से बनती हैं.”

वह मानते हैं कि विभिन्न त्वचा रोगों को लेकर लोगों में तमाम भ्रांतियां हैं और लोगों में जागरूकता की कमी है.

अकादमी के प्रमुख ने कहा, “हमारे डॉक्टर जिला अस्पतालों में लोगों का टेली-त्वचाविज्ञान से उपचार करेंगे और उनके स्थानीय डॉक्टरों को सही इलाज भी बताएंगे. यह सुविधा राज्य और अन्य राज्यों की पीएचसी तक पहुंचाई जाएगी.”

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