स्मार्ट सिटी : मिलना था 2 हज़ार करोड़, मिले 155 करोड़

रायपुर | संवाददाता: देश भर के 100 स्मार्ट सिटी के लिये केंद्र सरकार ने अब तक प्रति शहर औसतन 155 करोड़ रुपये दिये हैं. जबकि इस योजना के तहत हरेक शहर को 2050 करोड़ रुपये से अधिक की रकम चाहिये थी.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर को तो स्मार्ट सिटी बनाने के लिये अब तक महज 58 करोड़ रुपये ही मिले हैं.


स्मार्ट सिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी परियोजना रही है. देश के 100 शहरों को स्मार्ट बनाने की दिशा में सरकार लगातार कोशिश भी करती रही है.

लेकिन आज की तारीख में इस योजना के कई साल गुजर जाने के बाद भी एक भी शहर ऐसा नहीं है, जिसे स्मार्ट सिटी का तमगा दिया जा सके.

स्मार्ट सिटी की परियोजना को लेकर समय-समय पर यह सवाल उठते रहे हैं कि आखिर इतने कम बजट में किसी शहर को स्मार्ट कैसे बनाया जा सकता है. लेकिन केंद्र सरकार का दावा था कि 2019 तक सारा कुछ ठीक हो जायेगा.

भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2016 में 20 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का लक्ष्य रखा गया था.

मई 2016 में 13 शहरों को और शामिल किया गया. सितंबर 2016 में 27 शहर शामिल हुये. जून 2017 में 30 और शहर स्मार्ट सिटी की कतार में लगा दिये गये.

इसके बाद पिछले साल जनवरी और जून में 10 और शहरों को इसमें शामिल कर लिया गया.

चयन किये गये इन 100 शहरों द्वारा अपने स्मार्ट सिटी प्रस्ताओं में 2,05,018 करोड़ रुपये मूल्य की कुल 5,151 परियोजनायें शामिल की गई थीं.

इस लिहाज से इस परियोजना के लिये हरेक शहर को औसतन 2050 करोड़ रुपये चाहिये थे.

लेकिन 2019 तक केंद्र सरकार ने इसके लिये महज 155 करोड़ रुपये की रक़म ही उपलब्ध कराई. केंद्र सरकार ने 100 शहरों के लिये अब तक कुल 15,536 करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराये हैं.

छत्तीसगढ़ के शहरों की बात करें तो 2016 से अब तक रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये 196 करोड़ रुपये, नया रायपुर को 122 करोड़ रुपये और बिलासपुर शहर को केवल 58 करोड़ रुपये ही मिले हैं.

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