रोहित वेमुला के शव पर राजनीति: स्मृति

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बुधवार को संसद में रक्षात्मक की बजाये आक्रमक दिखीं. उन्होंने शिक्षा संस्थाओं से संबंधित मुद्दों पर मोर्चा संभाला. उल्लेखनीय है कि इन दिनों जेएनयू का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी उठ रहा है जिससे सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की विदेशों में चमक पर असर पड़ सकता है. स्मृति ईरानी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि रोहित वेमुला के शव पर राजनीति हो रही है. राज्यसभा में जहां स्मृति ईरानी ने मायावती का सामना किया वहीं लोकसभा में उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया.

लोकसभा में-
मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की रपट का उल्लेख करते हुए कहा कि उमर खालिद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को गुमराह किया.


रपट में कहा गया है, “जेएनयू के छात्र उमर खालिद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को दिए आवेदन में कहा था कि वह काव्य पाठ का एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है.”

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ईरानी ने कहा कि रोहित वेमुला के शव को एक राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने अपने बयान में कहा, “रोहित वेमुला ने अपने बयान में कहा है कि उसकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है. वेमुला को डॉक्टर के पास ले जाने की कोई कोशिश नहीं हुई. उसके शव का इस्तेमाल एक राजनीतिक औजार के रूप में हुआ.”

वेमुला के मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए ईरानी ने कहा, “कार्यकारी समिति जिसने रोहित वेमुला को निलंबित करने का फैसला किया, उसे कांग्रेस ने गठित की थी.”

ईरानी ने आगे कहा, “मैंने बार-बार कहा है कि शिक्षा को लड़ाई का मैदान न बनाएं. क्या आपने कभी देखा है कि राहुल गांधी किसी एक जगह पर दोबारा गए हैं? नहीं, उन्होंने वहां एक राजनीतिक अवसर देखा न?”

“यहां तक कि इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हो गईं, लेकिन उनके बेटों ने कभी भी भारत की बर्बादी के लिए लगाए जाने वाले नारों का समर्थन नहीं किया.”

राज्यसभा में-
बुधवार को राज्यसभा में स्मृति ईरानी की बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ तीखी झड़प भी हो गई. बसपा सदस्य राज्यसभा के सभापति की आसंदी के समक्ष नारेबाजी कर रहे थे, जिसके कारण भोजनावकाश से पहले सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.

जब सदन की कार्यवाही जब दोपहर दो बजे शुरू हुई, आक्रोशित दिख रहीं स्मृति ने पहले बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा को चुनौती दी. उन्होंने कहा, “आमने-सामने आकर बात कीजिए सतीश जी, मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं.”

मंत्री ने कहा, “मायावती जी आप वरिष्ठ सदस्य हैं और आप जवाब चाहती हैं. मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं. अगर आप मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं होंगी, तो मैं अपना सिर काटकर आपके कदमों में रख दूंगी.”

इसके बाद भी मायावती जब न्यायिक समिति में दलित सदस्य के होने की बात उठाती रहीं तो स्मृति ने कहा, “एक दलित प्रोफेसर हैं, जिनका निर्णय आपको स्वीकार नहीं..आप यह कहना चाहती हैं मायावती जी कि एक दलित तभी दलित हो सकता है, जब आप उन्हें दलित होने का प्रमाण पत्र दे दें.”

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