‘स्मृति को बर्खास्त करना चाहिए’

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने का फैसला किया है. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय मामले और दलित शोध छात्रा रोहित वेमुला मामले में अगर उन्होंने जानबूझकर दोनों सदनों को गुमराह किया है तो उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कोलकाता में कहा, “निश्चित रूप से, अगर उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया हो.”

मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने दावा किया कि वेमुला के कमरे तक पुलिस और डॉक्टर को पहुंचने की इजाजत नहीं दी गई ताकि मामले का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन हैदराबाद विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधिकारी पी. राजश्री ने मंत्री के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने जांच की थी. इसके अलावा रोहित की मां राधिका और उसके भाई ने भी मंत्री द्वारा किए गए दावों से इनकार किया है.

लोकसभा की कार्रवाई के नियम और कार्यसंचालन के नियम 222 के मुताबिक, “किसी अन्य सदस्य, सदन या समिति के खिलाफ एक सदस्य भी अध्यक्ष की सहमति से विशेषाधिकार हनन का मामला उठा सकता है.”

हालांकि यह लोकसभा अध्यक्ष पर निर्भर करता है कि वे विशेषाधिकार हनन के नोटिस को मंजूरी दें. यही प्रक्रिया राज्यसभा के लिए है जहां चेयरमैन मंजूरी देते हैं.

लोकसभा में 24 फरवरी की बहस में भाग लेते हुए ईरानी ने दोनों मामलों पर सदन में जबाव दिया था.

पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप का कहना है, “अगर कोई सदस्य सदन में गलत या झूठ बोलता है और ऐसा जानबूझकर करता है, सदन को गुमराह करने की कोशिश करता है. तो सदन का कोई भी सदस्य अध्यक्ष को नोटिस देकर विशेषाधिकार हनन के मामले को उठाने की अनुमति मांग सकता है. उसके बाद यह अध्यक्ष पर निर्भर करता है.”

कश्यप ने कहा कि यह सदन के अध्यक्ष पर निर्भर करता है कि वे किसकी बात को स्वीकार करते हैं मंत्री की या सदस्य की.

ईरानी द्वारा वेमुला मामले में दिए गए बयानों पर ही सवाल नहीं उठ रहे हैं, बल्कि उन्होंने जेएनयू परिसर में महिषासुर दिवस के आयोजन के बारे में जिन पैम्फलेट को दोनों सदनों में पढ़कर सुनाया था, उसे आयोजकों ने खारिज कर दिया.

क्या कोई मंत्री या संसद सदस्य ऐसा दस्तावेज पढ़ सकता है जिसकी सत्यता सुनिश्चित नहीं है?

कश्यप कहते हैं, “जो भी बयान कोई मंत्री देता है और जिन दस्तावेजों के आधार पर देता है, उसकी सत्यता के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं.”

कांग्रेस ने जहां विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी करने की बात कही हैं. वहीं अभी तक वाम दलों ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है.

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य डी. राजा ने कहा, “हम सभी वाम दल आपस में इस मामले पर विचार-विमर्श कर रहे हैं. हम रविवार को इस संबंध में फैसला करेंगे.”

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