सोनी सोरी को जमानत

दंतेवाड़ा | संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के लिये कथित तौर पर काम करने वाली सोनी सोरी और उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को जमानत दे दी है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों को अंतरिम जमानत दी थी लेकिन इनके छत्तीसगढ़ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था. अब वे देश में कही भी आने-जाने के लिये स्वतंत्र हैं.

हालांकि इस दौरान इन दोनों को देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी.


अदालत ने उन्हें 50 हज़ार रुपये के मुचलके पर जमानत देते हुये, प्रत्येक सोमवार को स्थानीय थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के भी निर्देश दिये हैं.

बस्तर के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका, सोनी सोरी को पांच अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था. उन पर माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप है.

सोनी सोरी का मामला तब चर्चा में आया, जब अक्तूबर 2011 में कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सर्वोच्च अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सोरी के शरीर में कुछ बाहरी चीजें पाई गईं. लेकिन यह टीम यह नहीं तय कर पाई कि ये चीजें कैसे उनके जननांगों में डाली गईं.

सोनी सोरी के खिलाफ राज्य सरकार ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ आठ अलग-अलग मुकदमे दर्ज किये गये थे. इनमें से पांच मामलों में सोनी सोरी को पहले ही निर्दोष करार दे दिया गया है. इसके अलावा एक मामला दाखिल दफ्तर किया जा चुका है और एक मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है.

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