स्पेक्ट्रम मामले की सुनवाई 15 सितंबर को

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मनमोहन सरकार द्वारा जनवरी 2002 में निजी दूर संचार कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाने से संबंधित मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है. केंद्रीय जांच ब्यूरो के विशेष न्यायाधीश ओ.पी.सैनी ने इस मामले में सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए मुलतवी कर दी.

सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल 2013 को सुनवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि निचली अदालत में सुनवाई अगले आदेश तक मुलतवी रहेगी. सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश भारती सेलुलर के मुख्य प्रबंध निदेश सुनील भारती मित्तल और एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि रुईया की याचिकाओं पर आया था, जिसमें विशेष अदालत की 19 मार्च 2013 के आदेश को चुनौती दी गई थी. अदालत ने दोनों को आरोपी मानते हुए मामले में सम्मन भेजा था. मामले के आरोपी पूर्व दूर संचार सविच श्यामल घोष अदालत में मौजूद थे.


सीबीआई ने 21 दिसंबर, 2012 को घोष और तीन अन्य टेलीकॉम कंपनियों भारती सेलुलर लिमिटेड, हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (वोडाफोन इंडिया लिमिटेड) और स्टर्लिग सेलुलर लिमिटेड (फोडाफोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड) के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए थे.

यह मामला राजग सरकार के दौरान 31 जनवरी 2002 में दूर संचार विभाग द्वारा अतिरिक्त स्पैक्ट्रम आवंटित किए जाने से जुड़ा हुआ है, जिससे राजकोष को कथित रूप से 846 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. हालांकि सीबीआई ने मित्तल, रुईया और हचिसन मैक्स टेलीकॉम लिमिटेड प्राइवेट लिमिटेड के असीम घोष का नाम नहीं लिया था, लेकिन विशेष अदालत ने आरोपी मानते हुए सम्मन जारी किया था.

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