ब्रिटिश मांग ठुकराई श्रीलंका ने

कोलंबो | एजेंसी: श्रीलंका ने साफ कर दिया है कि उसके मानवाधिकार रिकार्ड की अंतर्राष्ट्रीय जांच की कोई जरूरत नहीं है, जैसा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने प्रस्ताव किया है.

श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री निमाल सिरिपाला डीसिल्वा ने शनिवार को इस बात पर जोर दिया कि उनका देश एक संप्रभु राष्ट्र है और इसलिए यह अंतर्राष्ट्रीय जांच के प्रयासों का विरोध करेगा.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने श्रीलंका को कड़ा संदेश देते हुए शनिवार को कहा कि अगर उसने मार्च 2914 तक अपने मानवाधिकार रिकार्ड की जांच नहीं पूरी की, तो उनका देश यहां हुए कथित युद्ध अपराधों की अंतर्राष्ट्रीय जांच के लिए दबाव बनाएगा.

डीसिल्वा ने कहा कि यह ब्रिटेन द्वारा दी गई पहली धमकी नहीं है. उन्होंने कहा कि श्रीलंका सरकार देश के मानवाधिकारों के मसले पर अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अन्य सदस्यों से अपील करेगी.

डीसिल्वा ने कहा, “राष्ट्रमंडल का इस्तेमाल एक वैश्विक पुलिस के रूप में नहीं किया जाएगा.”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल एक ऐसा मंच होना चाहिए, जिसके जरिए इसके सदस्य देश सहमति पर पहुंचने के लिए साथ काम करें, किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी के मसले पर फैसला सुनाए.

डीसिल्वा ने राष्ट्रमंडल के शासनाध्यक्षों की बैठक, चोगम से अलग एक प्रेस वार्ता में कहा, “राष्ट्रमंडल में सभी देश समान हैं. हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और एक-दूसरे के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.”

उत्तरी श्रीलंका में हुए कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का हवाला देते हुए डीसिल्वा ने कहा कि उत्तर के अधिकांश लोगों का ख्याल रखा गया है और देश पर लगाए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप निराधार हैं.

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे 2015 तक राष्ट्रमंडल के अध्यक्ष रहेंगे. श्रीलंका चोगम की मेजबानी भी कर रहा है.

श्रीलंका सरकार ने तीन दशकों तक लिट्टे के खिलाफ युद्ध लड़ा और अंत में 2009 में उसने लिट्टे को पूरी तरह परास्त कर दिया, लेकिन इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में अंतर्राष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है.

कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर और मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने चोगम में शिरकत न करने का फैसला किया.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी घरेलू दबाव के कारण 10 नवंबर को इस बैठक में हिस्सा न लेने की घोषणा की थी.


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