वेदांता ग्रुप की स्टरलाइट पर सौ करोड़ का जुर्माना

उच्चतम न्यायालय ने स्टरलाइट इंडसट्रीज़ को तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित तांबा गलाने के संयंत्र में पर्यावरण कानूनों की अनदेखी करने के लिए 100 करोड़ का जुर्माना लगाया है. अनिल अग्रवाल के स्वामित्व वाले वेदांता समूह की इस कंपनी को इस जुर्माने की रकम पाँच साल की अवधि के अंदर तूतीकोरिन जिला प्रशासन को चुकानी होगी.

जस्टिस ए.के.पटनायक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि कंपनी के कार्यखाने के कारण लंबे समय से प्रदूषण हो रहा है और इसीलिए कंपनी को इसके लिए मुआवज़ा देना होगा. पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले में 100 करोड़ से कम की राशि के मुआवजे के बिना कानून का डर पैदा नहीं होगा.


हालांकि न्यायालय ने कंपनी के तूतीकोरिन संयंत्र को बंद करने के मद्रास उच्च न्यायालय के साल 2010 में दिए गए आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके चलते संयंत्र में तांबा गलाने का काम चालू रहेगा.

गौरतलब है कि मद्रास उच्च न्यायालय ने आदेश दिए थे कि लगातार पर्यावरण कानूनों की अनदेखी के चलते इस संयंत्र को बंद कर दिया जाए. उच्च न्यायालय का कहना था कि कंपनी ने यूनिट के 250 मीटर के दायरे में एक ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं की है और ये संयंत्र समुद्र तट के बहुत निकट है इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश कंपनी वेदांता की स्वामित्व वाली स्टरलाइट का कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट तमिलनाडु के तटीय इलाके तूतीकोरिन में 14 वर्षों से है और इस प्लांट पर लगातार पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं और अब उच्चतम न्यायालय ने कंपनी पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया है.

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