19 छात्र अब भी लापता

मंडी | एजेंसी: ब्यास नदी की तेज धारा में बह जाने 19 अब भी लापता हैं. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के कर्मचारी और सेना के जवान बचाव एवं राहत कार्य में जुटे हुए हैं. इस बीच राज्य सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य की राजधानी शिमला में इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक की और बचाव और राहत कार्य की समीक्षा की. इसके साथ ही उन्होंने पानी छोड़े जाने के समय सतर्कता भोंपू बजाने का निर्देश दिया.


एनडीआरएफ के कमांडिंग अधिकारी जयदीप सिंह ने कहा, “दो दिनों में हमने पांच शव बरामद किए हैं.”

उन्होंने कहा कि 10 गोताखोरों के साथ 84 लोगों की टीम बचाव कार्य में जुटी हुई है. उन्होंने दुर्घटना स्थल हनोगी माता मंदिर के पास थालौट से पंडोह बांध तक खोज अभियान शुरू किया.

बांध दुर्घटना स्थल से करीब 15 किलोमीटर नीचे है. अधिकारियों का कहना है कि सेना के एक दल ने भी मंगलवार को खोज अभियान शुरू किया.

ब्यास नदी की तेज धारा की चपेट में आने वाले छात्र हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज वी. एन. आर. विज्ञान ज्योति इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के थे, जो मनाली घूमने गए थे. 60 से अधिक छात्र और फैकल्टी सदस्य मनाली पहुंचे थे.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उनमें से कुछ नदी किनारे खड़े होकर फोटो ले रहे थे, जब पास की ही लारजी पनबिजली परियोजना के बांध से छोड़े गए पानी के कारण ब्यास नदी की तेज धारा में बह गए. यह पानी बिना किसी पूर्व सूचना के छोड़ा गया था, जिसकी वजह से नदी का जल स्तर अचानक बढ़ गया.

मुख्यमंत्री ने राज्य बिजली विभाग को पानी छोड़ने के दौरान सुरक्षा के मानक और अतिरिक्त सावधानी बरतने का निर्देश दिया है जिससे भविष्य में इस तरह के हादसे की पुनरावृत्ति न हो.

मुख्यमंत्री ने कहा कि खतरनाक एवं संवेदनशील स्थलों के अतिरिक्त सभी बांध के दो-तीन किलोमीटर के दायरे में नदी के किनारों पर बाड़ लगाए जाएं और साइन बोर्ड लगाए जाएं.

उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और लापरवाही बरतने के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतकों के परिजनों के लिए 1.5 लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की है.

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इसे न केवल क्रूर, बल्कि गंभीर लापरवाही बताया है. इस दुर्घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने कहा, “यह बेहद दुखद है कि पनबिजली परियोजना के अधिकारियों की लापरवाही के कारण छात्रों की मौज-मस्ती एक हादसे में बदल गई.”

उन्होंने राज्य सरकार को इस घटना पर 16 जून तक स्थिति रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा है.

दुर्घटना स्थल राज्य की राजधानी शिमला से करीब 200 किलोमीटर दूर और कुल्लू तथा मंडी जिलों की सीमा पर है.

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