कृषि विकास बढ़ाना होगा

नई दिल्ली | एजेंसी: केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश में कृषि तथा उससे जुड़े क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देते हैं. इसके बावजूद सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान सुस्त है.

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है. वित्त मंत्री जेटली ने आश्वासन दिया कि अर्थव्यवस्था की कठिनाईयों के बावजूद सरकार इस क्षेत्र के विकास की भरपूर कोशिश करेगी.

जेटली गुरुवार को यहां कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श कर रहे थे.

इस बैठक में वित्त तथा कापोर्रेट मामलों की राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त सचिव डॉ. अरविंद मायाराम, व्यय सचिव रतन पी. वटाल, राजस्व सचिव राजीव टकरू, कृषि तथा सहकारिता सचिव आशीष बहुगुणा तथा वित्त मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

बैठक में कृषि क्षेत्र के विभिन्न प्रतिनिधियों ने कई सुझाव दिए. मिले सुझावों में किसान टीवी चैनल शुरू करना ताकि नई तकनीकी, सरकारी कार्यक्रमों तथा गुणवत्ता के पैमानों के बारे में किसानों को जागरूक बनाया जा सके.

इसके अलावा उत्पादन लागत में 50 प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर समय से निर्णय, कारगर उगाही नीति बनाना, वस्तु अनुसार बोर्ड गठित करना, सिंचाई पर जोर के साथ जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में लेना, सिचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करना तथा नदियों को जोड़ने आदि का सुझाव दिया गया.

बैठक में राष्ट्रीय जल प्राधिकरण तथा नदी घाटी प्राधिकरण स्थापित करने के सुझाव भी दिए गए. अन्य सुझावों में सूचना प्रौद्योगिकी, नई विपणन तकनीक, प्रत्येक पंचायत में मिट्टी की जांच की सुविधा स्थापित करना, पशुपालन को लाभकारी पेशा बनाना तथा कृषि अनुसंधान तथा विस्तार सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है.

इस बैठक में प्रो. एम.एस.स्वामीनाथन अनुसंधान संस्थान के प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन, डीएआरई के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक एस. अयप्पन, एग्रीकलचरल इक्नोमिक्स एंड पोलसी रिसर्च के डॉ.रमेश चन्द, गुजरात अनुसंधान विकास संस्थान के प्रो.केशव दास, भारतीय प्रबंध संस्थान बेंगलूरू के डॉ.गोपाल नाइक, कृषि मूल्य आयोग के डॉ.अशोक विशन दास, इंडियन फार्मर एसोसिएशन कनसोर्टियम के पी.चिंगल, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के डॉ. के.वी. प्रभु, पंजाब कृषि विश्व विद्यालय के डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों, कारगिल इंडिया प्रा.लि. के सिरज चौधरी, अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के तुषार शाह, वाटरशेड आर्गनाइजेशन ट्रस्ट के क्रिसपिनो लोबो, नेशनल कोआपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया के डॉ. दिनेश, यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउथ इंडिया के विजयन राजे तथा अखिल भारतीय मसाला निर्यातक मंच के गिमोन कोरा ने हिस्सा लिया.

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