राजनीति में शिक्षकों का बोलबाला

जगदलपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के बस्तर में शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति के मैदान में उतरने वाले लोग सफल राजनेता साबित हुए हैं. जनजाति बहुल इस इलाके में अनपढ़ और कम पढ़े लोग भी राजनीति के चर्चित चेहरे रहे हैं.

मंत्री, पांच बार विधायक और तीन दफे सांसद रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानकूराम सोढ़ी 1962 में शिक्षक की नौकरी छोड़कर निर्दलीय विधायक का चुनाव जीते थे. वहीं, शिक्षक के पेशे के बाद जनसंघ से जुड़े बलीराम कश्यप मंत्री, चार बार विधायक और तीन बार सांसद रह चुके हैं. केंद्रीय मंत्री और पांच दफे सांसद रहे अरविंद नेताम राजनीति में आने से पहले जगदलपुर में शिक्षक थे.


इसी तरह अंतागढ़ से चुनाव जीते मंत्री विक्रम उसेंडी और उनके परंपरागत प्रतिद्वंदी कांग्रेस के पूर्व विधायक मंतूराम पवार दोनों ही शिक्षक रह चुके हैं. झितरूराम बघेल मंत्री और चार बार विधायक रहे, अघन सिंह ठाकुर मंत्री और दो दफे विधायक रहे.

इसी क्रम में भुरसुराम राग का नाम भी आता है जो तीन दफे विधायक रहे. अंतूराम कश्यप दो बार विधायक रहे तो विधायक और सांसद रहे महेंद्र कर्मा के बड़े भाई लक्ष्मण कर्मा भी विधायक रहे जो कभी शिक्षक थे.

जिला पंचायत अध्यक्ष और विधायक लच्छूराम कश्यप भी शिक्षक रहे हैं. राजाराम तोड़ेम मप्र में प्रतिपक्ष के नेता रह चुके हैं तथा पूर्व विधायक संपत सिंह भंडारी व कृष्ण कुमार ध्रुव भी शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरे और अपनी शानदार पारी खेली.

शिक्षक की सेवा त्यागकर राजनीति में आए लोग कांग्रेस और भाजपा के अलावा निर्दलीय के रूप में भी सफलता के झंडे गाड़ चुके हैं. शिक्षक के अलावा दीगर पेशे से आए लोगों को मतदाताओं ने ज्यादा भाव नहीं दिया. ऐसे गिने-चुने लोग ही राजनीति में जौहर दिखा सके. भाजपा विधायक डॉ. सुभाऊराम कश्यप पहले चिकित्सक थे, तो तीन दफे कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र पामभोई पहले कंपाउंडर थे.

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