तेलंगाना बंद का भारी असर

हैदराबाद| समाचार डेस्क: तेलंगाना बंद के कारण तेलंगाना के अधिकांश इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है.राष्ट्र समिति प्रमुख के.चंद्रशेखर राव की ओर से गुरुवार को एक दिन के बंद के आह्वान से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है. राव ने तेलंगाना के 205 गांवों को आंध्र प्रदेश के पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए दिए जाने के केंद्र सरकार के अध्यादेश के विरोध में बंद का आह्वान किया है.

हैदराबाद सहित 10 जिले की सड़कों से सड़क परिवहन निगम की बसें नदारद हैं. दुकानें, होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी तेलंगाना के कई हिस्से में बंद हैं.

टीआरएस नेता बसों को आरटीसी डिपो से बाहर निकलने से रोकने के लिए इसके बाहर सुबह से ही बैठ गए हैं. हैदराबाद से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न मार्गो की तरफ जाने वाली बस सेवाएं स्थगित हो गई हैं. हैदराबाद और सिकंदराबाद में भी आरटीसी की सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.

बोर्ड आफ इंटरमिडिएट एजुकेशन ने 11वीं और 12वीं की गुरुवार को होने वाली पूरक परीक्षा को स्थगित कर दिया है. राव ने खम्मम जिले 205 गांवों को आंध्र प्रदेश को दिए जाने के केंद्र सरकार के अध्यादेश के विरोध में बंद का आह्वान किया है.

उन्होंने इस अध्यादेश को गैर संवैधानिक करार देते हुए कहा कि केंद्र दो राज्यों से बिना बातचीत किए यह फैसला नहीं कर सकती. खम्मम जिले विशेषकर भद्रचालम और पालवांचा मंडल में बंद का व्यापक असर दिख रहा है. गांवों में रहने वाले दो लाख लोगों ने केंद्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है. इन लोगों में अधिकांश कबायली लोग हैं.

परियोजना के निर्माण से इन गांवों के जलमग्न होने का खतरा है और अंतर्राज्यीय झगड़े से बचने के लिए इसे आंध्र प्रदेश में मिलाया जा रहा है. इस बीच, आंध्र प्रदेश के निर्वाचित मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडु ने तेलंगाना के अपने समकक्ष से पोलावरम परियोजना का राजनीतिकरण न करने और उकसाहट भरे बयान न देने की मांग की है.

तेलुगू देशम पार्टी प्रमुख यह जानना चाहते हैं कि राव उस वक्त क्यों चुप थे जब केंद्र सरकार ने पोलावरम को राष्ट्रीय दर्जा देने की घोषणा की थी और कहा था कि इसका आंध्र प्रदेश में विलय कर दिया जाएगा. नायडु ने कहा कि अगर राव नए राज्य के विकास की तरफ ध्यान दें तो वह तेलंगाना को पूरा सहयोग देंगे.

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