तेलंगाना विधेयक वापस केंद्र के पास

नई दिल्ली | एजेंसी: आंध्र प्रदेश राज्य पुनर्गठन विधेयक 2013 सोमवार को विधानमंडल में चर्चा और दोनों सदनों में विधेयक को खारिज करने वाले प्रस्ताव के पारित होने की रिपोर्ट के साथ केंद्र को सौंप दिया गया. इस दस्तावेज में विधायकों की राय, उनके सुझाव और संसोधन भी शामिल हैं जो कड़ी सुरक्षा के बीच एयर इंडिया के विमान से सोमवार तड़के दिल्ली पहुंचा.

35 बंडलों और लगभग 500 किलोग्राम वजन के ये दस्तावेज राज्य सचिवालय से राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा भेजे गए और फिर इसे वहां दिल्ली लाया गया.


यह दस्तावेज केंद्रीय गृह मंत्री को भेजा जाएगा. तेलंगाना मामले पर मंत्रियों के समूह दिल्ली में मंगलवार को बैठक करेंगे, और इसके बाद वे विधानमंडल की राय और सुझाव पर नजर डालेंगे. मंत्रिमंडल इस अंतिम विधेयक को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपेंगे जहां से यह संसद जाएगा.

विधानसभा और विधान परिषद में 30 जनवरी को ध्वनिमत से इस विधेयक को खारिज करने वाला प्रस्ताव पारित हो गया, जिसमें विधेयक को संसद न भेजने की अपील राष्ट्रपति से की गई है.

हालांकि, विधायकों के सुझाव और राय को एकत्रित करने में तीन दिन का वक्त लगा. विधानमंडल के अधिकारियों ने तेलुगू और ऊर्दू में दी गई राय को अंग्रेजी में अनुवाद किया. अधिकांश विधायकों ने अपनी राय, सुझाव और संसोधन लिखित पेश किए थे.

विधानसभा अध्यक्ष एन.मनोहर ने घोषणा की थी कि विधेयक के संदर्भ में 9,072 लिखित संसोधन और सुझाव मिले हैं. अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री को दस्तावेज की 50 प्रतियां भेजी गई हैं.

विधानमंडल के सचिव राजा सादाराम ने रविवार को सभी दस्तावेजों के साथ विधेयक मुख्य सचिव पी.के.मोहंती को सौंप दिया है. मोहंती ने विधेयक को दिल्ली भेजे जाने की तैयारी के लिए अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की.

मुख्यमंत्री किरन कुमार रेड्डी ने विधानसभा में विधायक को खारिज करने वाला प्रस्ताव पेश किया था. उनके और सीमांध्र के अन्य नेताओं का विश्वास है कि राष्ट्रपति विधेयक को संसद भेजने से पहले प्रस्ताव पर विचार करेंगे, तेलंगाना के विधायकों का मानना है कि यह प्रस्ताव राज्य विभाजन के फैसले पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा.

राष्ट्रपति ने 12 दिसंबर को यह विधेयक राज्य विधानसभा में भेजा था, जिस पर 23 जनवरी तक राय बनानी थी. यह विधेयक 26 दिसंबर को सदन में पेश किया गया था. हालांकि, सीमांध्र विधायकों के विरोध की वजह से इस पर एक भी दिन चर्चा नहीं हो पाई.

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