तिरंगा की ज़रुरत किसे हैं?

विष्णु राजगढ़िया फेसबुक पर

जाति-धर्म, क्षेत्र-भाषा, शमशान-कब्रिस्तान की गन्दी राजनीति ही क्या कम थी, जो झंडे का मुद्दा उठा लाए?


तिरंगा पूरे देश का झंडा है और किसी राज्य को अलग झंडा रखने की इजाजत नहीं. जम्मू कश्मीर का विषय अलग है जिसे विशेष संवैधानिक व्यवस्था प्राप्त है.

कर्नाटक राज्य के अलग झंडे की बात करना कांग्रेस के दिवालियेपन का उदाहरण है. लेकिन शायद इससे उसे प्रदेश की राजनीति में अपना लाभ दिख रहा हो. भले ही देश का नुकसान हो.

राष्ट्रीय राजनीति में अलग बात और प्रदेश में अलग बात बोलने की यह प्रवृति चिन्ताजनक है. कल ही गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बीफ के पक्ष में बयान दिया. भाजपा की कई प्रदेश इकाइयां बीफ के मामले में राष्ट्रीय भाजपा से अलग स्टैंड लेती हैं.

अब अगर कांग्रेस भी राष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा की बात करते हुए कर्नाटक में अलग झंडे के नाम पर देशविरोधी काम करे, तो ऐसे लोकतंत्र पर रोया ही जा सकता है. यह बेचारगी इसलिए, कि कौन जाने कल इसी देशविरोधी राजनीति का उसे लाभ मिल जाए.

क्या देश को भावनात्मक मुद्दों से ऊपर लाकर बुनियादी सवालों को केंद्रित करने की शुरुआत होगी? क्या गौरक्षकों को गुंडा की उपाधि देने के बाद मोदी जी देश को ऐसे तमाम भावनात्मक मुद्दों से ऊपर लाने की ठोस पहल करेंगे?

कांग्रेस के पाँव तो खुद कब्र में लटके हैं, उसे ऐसे राष्ट्रविरोधी मुद्दों के सहारे कर्नाटक में कोई राजनीतिक लाभ न मिले, इसके लिए देश भर में तीखा विरोध जरूरी है.

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