टीबी की नई दवा बेडाक्यूलाइन

नई दिल्ली | संवाददाता: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दवा प्रतिरोधी टीबी में प्रभावकारी बेडाक्यूलाइन के उपयोग की अनुमति दे दी है. अमरीका में दिसंबर 2012 से ही इस दवा के उपयोग की इजाजत दे दी गई थी. हांलाकि भारतीय बाजार में यह दवा अभी तक उपलब्ध नहीं है. लेकिन खबर है कि कुछ चिकित्सक दूसरे देशों से यह दवा मंगवाकर अपने मरीजो को दे रहें हैं.

पूरे विश्व में बहु दवा प्रतिरोधी टीबी के करीब पांच लाख मरीज हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में इसके करीब 73,000 मरीज हैं. इस दवा को यदि भारतीय बाजार में आने की अनुमति दे दी जाये तो इन मरीजों का भला होगा. क्योंकि इस तरह के टीबी में इलाज के लिये भारतीय बाजार में कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है. दवा के अभाव में मरने के अलावा इनके मरीजों के पास कोई औऱ विकल्प नहीं है.


साधारणतः टीबी का इलाज छः माह चलता है. लेकिन जब इसके कीटाणु दवाओं के विरुद्ध प्रतिरोध क्षमता विकसित कर लेते हैं तो प्रथम श्रेणी की दवाओं जैसे रिफामपासिन, आइसोनियाजाइड, इथमबुटाल, पायराजिनामाइड आदि से इलाज संभव नही रह जाता है. तब द्वितीय श्रेणी की दवा देनी पड़ती है.

ये द्वितीय श्रेणी की दवाए हैं रिफाबुटिन, लिनेज़ोलिड, थायोएसीटाजोन आदि. इन दवाओं के साथ समस्या यह है कि ये महंगी, कम प्रभावकारी तथा हानिकारक होती हैं. जिसे बीस माह तक मरीज को सेवन करना पड़ता है. कई मामलो में तो कोई भी दवा टीबी में काम नही करती है. ऐसे स्थिति में बेडाक्यूलाइन की विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उपयोग की सहमति देना एक क्रांतिकरण कदम है.

पिछले चालीस से भी ज्यादा सालों के पश्चात् यह दवा बाजार में आई है. निश्चित तौर पर भारत सरकार इसका अनुमोदन करेगी क्योंकि अब तो इसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निर्देश जारी किया है कि बेडाक्यूलाइन को चिकित्सीय देख-रेख में दिया में दिया जाये, मरीज की नियमित रूप से जांच की जाये, मरीज की लिखित सहमति के बाद ही इसका उपयोग शुरु हो, इसे द्वितीय श्रेणी की अन्य चार दवाओं के साथ दिया जाये तथा दुष्परिणाम के बारे में सचेत रहा जाये. इसके 400 मिग्रा की मात्रा दिन में एक बार दो हफ्तो तक दिया जाये. फिर 200 मिग्रा की मात्रा दिन में तीन बार 22 हफ्तों तक दी जाये. यहां यह भी ध्यान देने की जरुरत है कि 65 साल से अधिक उम्र के मरीजों को अत्यंत गंभीरत चिकित्सकीय देखभाल के बिना दवा न दी जाये और बच्चों और गर्भवती महिलाओं को यह दवा न दी जाये.

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