UN कोर्ट इतावली नौसैनिक के हक में

रोम | समाचार डेस्क: यूएन कोर्ट चाहती है कि इतावली नौसैनिक को उसके देश जाने दिया जाये. फिलहाल इतावली नौसैनिक सल्वाटोर गिरोने दिल्ली में इटली के दूतावास में कैद है. उस पर भारतीय मछुआों को मारने का आरोप है. इटली का तर्क है कि उसके सैनिक सैन्य मिशन पर थे तथा गलती से उन्होंने भारतीय मछुआरों को डाकू समझकर गोली चला दी थी. जबकि दसरे पक्ष का कहना है कि यूएन कोर्ट भारत तथा इटली से जमानत की शर्तो पर रियायत के लिये भारत के सर्वोच्य न्यायालय में जाने की बात कह रहा है. गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र के एक न्यायालय ने कहा है कि दो भारतीय मछुआरों की हत्या के सिलसिले में भारत में कैद इटली के नौसैनिक सल्वाटोर गिरोने को जमानत पर रिहा कर उसे स्वदेश लौटने की अनुमति दे देनी चाहिए.

इस दौरान द हेग में मामले की मध्यस्थता कार्यवाही चलती रहेगी. रोम में इटली के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण का यह अध्यादेश ‘मामले की मध्यस्थता प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा.’ मध्यस्थता प्रक्रिया इटली सरकार की इस अर्जी पर चल रही है कि आरोपी के खिलाफ मामला चलाने का अधिकार उसे है न कि भारत को.


गिरोने और इटली के एक अन्य नौसैनिक मैस्सीमिलानो लाटोरे पर भारत ने अपने दो मछुआरों की हत्या का आरोप लगाया है. इटली के दोनों नौसैनिकों ने फरवरी 2012 में केरल तट से लगे समुद्र में मछुआरों को समुद्री डाकू समझ कर उनपर कथिततौर पर गोलीबारी की थी, जिसमें दोनों मछुआरों की मौत हो गई थी.

इटली का कहना है कि नौसैनिकों को छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि वे एक सैन्य मिशन पर थे. मछुआरों की मौत समुद्री डाकू समझे जाने की गलती की वजह से हुई थी. उसका यह भी कहना है कि मामला भारत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, क्योंकि घटना भारत की सामुद्रिक सीमा से बाहर हुई थी.

स्वास्थ्य कारणों से लाटोरे पहले ही स्वदेश लौट चुका है. अब इटली की कोशिश दूसरे नौसैनिक, गिरोने को भी वापस ले जाने की है.

भारत ने गिरोने को रिहा करने से इनकार किया हुआ है. उसे नई दिल्ली में इटली के दूतावास परिसर में रखा गया है.

यह मामला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद की वजह बन गया है. बीते साल दोनों देश इसे द हेग स्थित स्थाई मध्यस्थता न्यायालय ले जाने और इसके फैसले को मानने पर राजी हुए थे.

इटली के विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह आदेश मंगलवार को औपचारिक रूप से द हेग में सार्वजनिक किया जा सकता है. मंत्रालय ने कहा कि ऐसा ‘भारत के रचनात्मक रवैये की वजह से संभव हो सका.’

मंत्रालय ने कहा कि न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों से नौसैनिक के घर लौटने की प्रक्रिया पर सहमति बनाने को कहा है. मंत्रालय ने कहा है कि गिरोने की इटली वापसी के लिए जल्द से जल्द भारत से संपर्क किया जाएगा.

लेकिन, नई दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि न्यायाधिकरण का आदेश स्पष्ट करता है कि गिरोने केवल भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है.

एक सूत्र ने कहा, “न्यायाधिकरण का आदेश केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्राधिकार की ही पुष्टि करता है. आदेश भारत और इटली से यही कह रहा है कि दोनों देश गिरोने की जमानत की शर्तो में रियायत के लिए सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क करें.”

सूत्रों ने कहा कि गिरोने की इटली की संभावित वापसी इस ‘कड़ी शर्त’ के साथ है कि इटली की सरकार को यह गारंटी देनी होगी कि न्यायिक कार्यवाही में जरूरत पड़ने पर गिरोने को भारत भेजा जाएगा.

गिरोन के पिता माइकल ने कहा, “अगर खबर सही है तो मैं बेहद-बेहद खुश हूं.”

लाटोरे को 2014 में दिल का दौरा पड़ने के बाद भारत ने इटली जाने की इजाजत दे दी थी.

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