फर्जी एनकाउंटर: तीन को फांसी, पाँच को उम्रकैद

लखनऊ | संवाददाता: सीबीआई की एक विशेष अदालत ने उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले में हुई फर्जी मुठभेड़ में एक डीएसपी और 12 अन्य लोगों की हत्या करने के जुर्म में तीन पुलिसकर्मियों को फांसी एवं पाँच अन्य को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. अदालत ने मामले में दोषी पाए गए पुलिसकर्मीयों आरबी सरोज, राम नायक पाण्डेय और रामकरन को फांसी और रमाकान्त दीक्षित, दारोगा नसीम अहमद, मंगल सिंह, परवेज हुसैन, राजेन्द्र प्रसाद सिंह को उम्रकैद की सज़ा सुनाई जबकि एक अन्य आरोपी पुलिसकर्मी प्रेम सिंह रैकवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है.

मामला 12 मार्च 1982 का है जब जिले के डीएसपी के.पी.सिंह माधवपुर गांव कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करने जा रहे थे लेकिन उन्हीं के मातहत रहे तीन पुलिसकर्मियों आरबी सरोज, राम नायक पाण्डेय और रामकरन ने उनकी हत्या करवाने के लिए आरोपियों को इसकी सूचना दे दी जिन्होंने के.पी सिंह की गांव में घुसते ही गोली मार कर हत्या कर दी.


बाद में इन पुलिसकर्मियों ने कुछ अन्य पुलिस वालों के साथ माधवपुर पहुँच कर 12 गांव वालों की निर्ममता से हत्या कर दी जिससे कि ये प्रतीत हो कि डीएसपी के.पी.सिंह की हत्या गांव में मुठभेड़ के दौरान हुई. लेकिन डीएसपी के.पी.सिंह की पत्नी विभा सिंह ने मुठभेड़ को फर्जी बता कर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसके बाद मामले की जाँच सीबीआई कर रही थी.

सीबीआई ने अपनी जाँच में मुठभेड़ को फर्जी पाया था और 19 आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था जिनमें से दस आरोपियों की मृत्यु विवेचना के दौरान ही हो गई.

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