..नेता जी के पीछे अब खाकी का पहरा नहीं

लखनऊ | एजेंसी: नेता जी के पीछे खाकी का पहरा हो या फिर चौकन्ना नजरों के साथ कंधे पर स्टेनगन..! अब यह गुजरे जमाने की बात होगी. उत्तर प्रदेश में अब नेता जी के रसूख में चार चांद लगाने वाले अंगरक्षक न सिर्फ बदले नजर आएंगे, बल्कि उन्हें पहचानना भी आसान नहीं होगा.

उप्र सरकार की एक विज्ञप्ति के मुताबिक, अंगरक्षकों का काम पहले की तरह ही होगा, लेकिन वह न तो वर्दी में होंगे और न ही खुलेआम शस्त्र लेकर चलेंगे. नए नियमों के तहत अब स्टेनगन की जगह उन्हें पिस्टल मुहैया कराई जाएगी.


उप्र सरकार ने गनर प्रथा खत्म कर दी है. अब जिन लोगों को गनर की जरूरत है, उन्हें उसके लिए पुलिस महकमे को कीमत चुकानी पड़ेगी. शासन ने पेड गनर व्यवस्था में संशोधन किया है.

अभी तो गनर नेताओं की रसूखदारी का सिंबल माने जाते हैं. जिन नेताओं के साथ गनर चलता है, माना जाता है कि उसकी अच्छी-खासी हनक है, लेकिन अब सरकार ने इस हनक को कम करने का इंतजाम किया है. नए नियम के अनुसार, अब गनर नेताजी की पहुंच का सिंबल नहीं बन सकेंगे. उनके लिए नए नियम लागू हो चुके हैं.

पहले की व्यवस्था में अंगरक्षक अधिकांश तौर पर वर्दी में ही रहते थे और उनके पास स्टेनगन होती थी, जिससे वह नेताओं के पीछे रहकर उनका रसूख बढ़ाने का काम करते थे. नई व्यवस्था के तहत पेड गनर वर्दी में नहीं होंगे और न ही उनके पास स्टेनगन होगी. विभाग की ओर से उन्हें एक पिस्टल मिलेगी वह पिस्टल वह ऐसे रखेंगे कि वह बाहर से किसी को दिखाई न पड़े.

गनर की नई व्यवस्था-सांसद, विधायक अन्य प्रतिनिधि के अलावा किसी को नहीं मिलेगी. नेता बड़ा हो या छोटा, बिना कीमत के गनर नहीं मिलेगा. 10 फीसदी में गनर हासिल करने का जुगाड़ भी खत्म हो गया है. ऐसे में अब जल्द ही नेताओं के मिजाज बदलते नजर आएंगे.

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