उपाध्याय छत्तीसगढ़ के डीजी चुने गए

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के प्रभारी डीजीपी अमरनाथ उपाध्याय महानिदेशक (डीजी) बनाए गए हैं. मुख्य सचिव सुनील कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई सक्रीनिंग कमेटी की बैठक में 1985 बैच के आईपीएस उपाध्याय को डीजी बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई. इसके साथ ही उपाध्याय के डीजीपी बनने का रास्ता साफ हो गया है.

प्रदेश पुलिस की कमान उपाध्याय को सौंपने का विधिवत आदेश अब जारी हो सकता है. वे राज्य के 9वें डीजीपी होंगे. गृह विभाग के प्रमुख सचिव एनके असवाल ने कहा है कि स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में एएन उपाध्याय की पदोन्नति को मंजूरी दे दी गई है.

मंत्रालय के आला अफसरों के अनुसार राज्य सरकार की विशेष पहल और आग्रह पर केन्द्र सरकार ने उपाध्याय को 10 महीने पहले ही डीजी के पद पर पदोन्नत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. उपाध्याय डीजी बनने की जरूरी पात्रता 30 साल की सेवा इस वर्ष दिसंबर में पूरी करेंगे. राज्य में अफसरों की कमी का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने उपाध्याय को समय से पहले पदोन्नत करने का आग्रह केन्द्र सरकार से किया था.

केन्द्र से सहमति मिलते ही सरकार ने शुक्रवार को सक्रीनिंग कमेटी की बैठक आयोजित कर उपाध्याय को डीजी बना दिया. मुख्य सचिव सुनिल कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य के नए मुख्य सचिव विवेक ढांड, गृह विभाग के प्रमुख सचिव एनके असवाल मौजूद थे.

सरकार के इस फैसले से राज्य काडर के दो वरिष्ठ अफसरों जेल विभाग के डीजी और 1983 बैच के आईपीएस गिरधारीलाल नायक और केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए 1984 बैच के आईपीएस एमडब्ल्यू अंसारी को तगड़ा झटका लगा है. राज्य सरकार इन दोनों अफसरों को दरकिनार कर 1985 बैच के आईपीएस उपाध्याय को डीजीपी बनाने जा रही है.

सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार डीजीपी के लिए नायक के नाम पर भी विचार कर रही थी, लेकिन डॉ. आनंद कुमार के नाम को लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से हुई शिकायतों को सरकार ने गंभीरता से लिया और नायक को पूरी तरह किनारे कर दिया. मंत्रालय के आला सूत्रों के अनुसार इस घटना के कारण नायक के भविष्य में डीजीपी बनने की संभावना भी पूरी तरह क्षीण हो गई है.

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