भारत के गुपचुप परमाणु कार्यक्रम से अमरीका अनजान

वाशिंगटन | समाचार डेस्क: अमरीका ने कहा है कि वह भारत के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है. उसका कहना है कि भारत के कोई भी ऐसे दस्तावेज उसके पास उपलब्ध नहीं है, जिससे यह अनुमान लगा सके कि वह भारत के किसी गुप्त परमाणु कार्यक्रम के बारे में जान सके.

अमरीका का कहना है कि परमाणु संधि के तहत भारत को ऐसा कुछ मुहैया नहीं कराया गया है, जिसका इस्तेमाल भारत अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में कर सकता हो. अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने रक्षा और सुरक्षा से जुड़े शीर्ष प्रकाशन ‘आईएचएस जेन’ की रिपोर्ट पर संवाददाताओं से कहा कि हम इसके निष्कर्ष पर कुछ भी अनुमान लगाने की स्थिति में नहीं हैं. हम असैन्य परमाणु संधि के तहत भारत को ऐसा कुछ उपलब्ध नहीं करा रहे, जिसका इस्तेमाल भारत की सैन्य क्षमता और सैन्य भंडार को बढ़ाने में हो. लेकिन कुछ कहने के लिए हमारे पास न तो पर्याप्त जानकारी है और न ही रिपोर्ट की कोई पुष्टि की गई है.


इस एचआईएस जेन्स की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि मैसूर के नजदीक इंडियन रेयर मेटल्स प्लांट की नई इकाई भारत के हथियार निर्माण की क्षमता को बढ़ा सकता है. यह 2015 के मध्य से अंत तक काम करना शुरू कर देगा. एचआईएस जेन्स ने यह रिपोर्ट भारतीय अधिकारियों के बयानों और उपग्रह से ली गई तस्वीरों के आधार पर तैयार की है.

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