अमरीका, इराक पर हमला करेगा?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: इराक ने अमरीका से हवाई हमला करने का आग्रह किया है. इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मालिकी ने अमरीका से यह मदद सुरक्षा समझौते के तहत मांगी है.

इसके बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है कि अमरीका का अगला कदम क्या होगा. गौरतलब है कि सुन्नी चरमपंथी समूह के आतंकवादियों ने इराक के कई शहरों पर कब्जा कर लिया है तथा अब वे बगदाद में घुसने की फिराक में है.


इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक के सुन्नी चरमपंथी समूह के आतंकवादियों पर हमला करने के लिये विचार विमर्श शुरु कर दिया है. ज्ञात रहे कि इराक एक शिया बहुल देश है परन्तु इस पर लंबे समय तक शासन करने वाले सद्दाम हुसैन सुन्नी थे. अमरीका द्वारा सद्दाम हुसैन को फासी पर चढ़ा दिये जाने के बाद से सत्ता शिया समुदाय के हाथ में है.

जिसका विरोध सुन्नी चरमपंथी कर रहें हैं. इराक के हालात अभी ऐसे हैं कि सुन्नी चरमपंथियों ने प्रमुख तेल के रिफाइनरियों पर कब्जा जमा लिया है. जाहिर है कि ऐसे हालात में अमरीका के सामने यक्ष प्रश्न इराक की सत्ता को बचाने से ज्यादा तेल के कुओं पर फिर से पश्चिमी देशों के कंपनियों का हक बहाल करना होगा.

हालांकि, बराक ओबामा ने पहले ही साफ कर दिया था इराक में फिर से अमरीकी सेना नहीं जायेगी. इसके बावजूद राजनीति के जानकारों का मानना है कि अमरीका तेल के कुओं को बचाने के लिये इराक के सुन्नी चरमपंथियों को हवाई हमलाकर खदेड़ने से बाज नहीं आयेगा.

गौरतलब है कि सऊदी अरब के बाद इराक में दुनिया का तेल का उच्च कोटि का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है. इराकी तेल निकाल कर बेचना भी अत्यंत लाभकारी है. एक अनुमान के अनुसार इराक में 112 बिलियन बैरल तेल का सुरक्षित भंडार है. लेकिन अमरीकी ऊर्जा विभाग के अनुसार यह 300 से 400 बिलियन बैरल का है. सद्दाम हुसैन को फांसी पर चढ़ा देने के बाद से इसके कुओं पर फिर से पश्चिमी देशों के तेल कंपनियों ने घुसपैठ बना ली है.

समाचारों के हवाले से खबर है कि अमरीका के एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर, जनरल मार्टिन डेम्पसी ने अमरीकी सांसदों के सामने पुष्टि करते हुए कहा, “इराक़ सरकार ने हमसे हवाई हमलों के लिए निवेदन किया है.” इसके अलावा जनरल डेम्पसी ने एक सीनेट समिति को बताया कि ”सुन्नी चरमपंथी समूह जहां कहीं भी हो, उनका विरोध करना अमरीका के राष्ट्रीय हित में होगा”.

इससे स्पष्ट है कि निकट भविष्य में इराक में फिर से अमरीकी हवाई हमलों का गौर शुरु होने वाला है. ज्ञात्वय रहे कि अमरीका पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उसकी विदेश नीति वहां की सरकार नहीं बल्कि वहां के उद्योग घराने तय करते हैं.

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