यूपी में बिजली संकट, विपक्ष लामबंद

लखनऊ | एजेंसी: यूपी की राजधानी लखनऊ और सूबे के अन्य जिलों में भी भीषण गर्मी से बिजली की मांग में रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है. पहले से जारी बिजली संकट में यह स्थिति कोढ़ में खाज की तरह है. अधिकारियों के मुताबिक बिजली की मांग अधिक होने की वजह से तय मानक से ज्यादा बिजली खरीदी जा रही है. दूसरी ओर विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से ही लोग बिजली से परेशान हैं.

बढ़ती मांग को देखते हुए पर्याप्त बिजली की उपलब्धता नहीं होने से प्रदेश की जनता को अभी कटौती से जूझते रहना होगा. इस बीच पारीछा बिजलीघर की दो यूनिटों से उत्पादन ठप हो जाने के कारण राज्य में बिजली संकट कुछ और बढ़ गया है.


तेजी से पारा चढ़ने के कारण राज्य में न केवल दिन में बल्कि रात में भी बिजली की मांग बढ़ रही है. स्थिति यह है कि बिजली की निर्धारित मांग 288 मिलियन यूनिट के रिकार्ड स्तर पर पहुंच रही है.

बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इनर्जी एक्सचेंज से भी अतिरिक्त बिजली खरीद रहा है लेकिन बिजली की निर्धारित मांग पूरी नहीं हो पा रही है.

बिजली की मांग से उपलब्धता के कम रहने से इन दिनों तय शेड्यूल से कम ही बिजली मिल पा रही है. ट्रांसफार्मरों की ओवरलोडिंग व जर्जर तारों के भी चलते घंटों बिजली कटौती से लोगों को जूझना पड़ रहा है.

पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ए.पी. मिश्र का कहना है कि अप्रत्याशित तौर पर पिछली बार से 50 मिलियन यूनिट से भी कहीं अधिक बिजली की मांग बढ़ी हुई है.

उन्होंने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए एक्सचेंज से अधिकतम बिजली खरीदी जा रही है. कुछ हद तक तय शेड्यूल के मुताबिक बिजली आपूर्ति के लिए लगभग साढ़े 12 हजार मेगावाट तक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से ही लोग बिजली से परेशान हैं. सरकार ने बिजली पर सरचार्ज भी लगा दिया लेकिन लोगों को बिजली मिल नहीं रही है.

राष्ट्रीय लोकदल प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना कुमार चौहान ने भी सरकार से अपील की है कि केंद्र से पत्र व्यवहार करने की बजाय वह लोगों को बिजली आपूर्ति कराए जिससे लोगों को राहत मिल सके.

विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि बिजली मुद्दे को विधानसभा सत्र के दौरान भी उठाया जाएगा.

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