तू मेरा चाँद मैं तेरी चांदनी

बादल सरोज
जबसे व्यापमं ने तूल पकड़ा है शिवराज सरकार दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए नियुक्तियों की जांच की धड़ाधड़ चेतावनियां दे रही है. कुछ नियुक्तियों को लेकर पूर्व विधानसभाध्यक्ष श्री निवास तिवारी पर कायमी-वायमी की खबरें भी आयी थीं. कल हाई कोर्ट के फैसले के बाद तो अब विधिवत आदेश भी हो गया है.

भानुमती का पिटारा खुलेगा तो उसमे से न तो बहुतेरे नगीने निकलने वाले हैं, न ही ग़ालिब की तरह ”चन्द तस्वीरे बुताँ चंद हसीनों के खुतूत” ही निकलने वाले हैं. निकलने वाली है राजकाज पर हावी वह सामन्ती सड़ांध जो अपनों को उपकृत करने के मामले में किसी मध्ययुगीन राजा की तरह खैरात बांटना अपना जन्मसिद्द अधिकार मानती है. निकलने वाला है वह बैताल जो सिंहासनारूढ़ हर विक्रम के काँधे पर सवार रहता है या यूं कहें कि यह विक्रम है जो इस बैताल के कन्धों पर चढ़े चढ़े सिंहासन पर बैठा अपनी बत्तीसी चमकाता रहता है.

पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में इसी मध्यप्रदेश में सिगरेट के पैकेट और बीड़ी के बण्डल पर “”सभी नियमों को शिथिल करके” नियुक्ति दिए जाने के हजारों आदेश हुए हैं.

जिस नियुक्ति को हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए पूरी जांच की टिप्पणी की है, स्वयं दिग्विजय सिंह के आदेशों से हुयी ऐसी कोई ग्यारह नियुक्तियों को इन पंक्तियों के लेखक ने 28 हजार दैनिक वेतन भोगियों की नियुक्ति समाप्ति के दिग्विजय सरकार के आदेश को निरस्त करवाने वाली सीटू की याचिका में हाई कोर्ट में प्रस्तुत किया था. बाद में मुख्यमंत्री पंचाट में भी रखा था.

इन सबकी जांच जरूरी है. माकूल कार्यवाही भी होनी चाहिए. किन्तु – और इस किन्तु के अनेक परन्तुक भी हैं – क्या मेरी कमीज काली तो तेरी भी काली कहने से व्यापमं और डीमैट का किया अनकिया हो जाएगा? इस खो-खो की पैंतरेबाजी और डब्लूडब्लूएफ सरीखी चीख चिल्लाहट से मुमकिन है कुछ सुर्खियां बटोर ली जाएँ, कुछ पॉइंट स्कोर हो जाएँ मगर 1 करोड़ 16 लाख परीक्षार्थियों के साथ किया गया व्यापमं और डीमैट जायज तो नही हो पायेगा. यह ठीक वैसा ही छायायुद्द् है जैसा “मेरा ललित मोदी तो तुम्हारा संतोष बगरोडिया” कह कर कल दिल्ली में बिना मुकाबले के वॉकओवर में जीता मान लिया गया.

लोकतंत्र परिपक्व हो चुका है. शासक माहिर हो गए हैं. सत्ता की चाशनी की वैतरणी के इस कुण्ड में डुबकी लगाने वाला कोई भी कपडे नही पहने है !! मिठास की आपूर्ति अबाधित रहे इसलिए एक ही घर के दो दरवाजों पर दो अलग अलग साइनबोर्ड लगाने का आसान रास्ता अपना लिया जाता है.

यूं एक दूजे के शासनकाल में एक दूसरे की निबाहने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी जाती. दिग्विजय मुख्यमंत्री थे, विधानसभा में भाजपा के एक बड़े नेता के विधानसभा क्षेत्र का एक बड़का आदमी अपना काम लेकर उनके पास पहुंचा. दिग्विजय सिंह ने उनके क्षेत्र वाले भाजपा नेता का नाम लेकर पूछा कि उनके पास गए थे क्या? वे बोले : गए थे, उन्होंने कहा कि आपके पास जायें और कहें कि उन्होंने भेजा है !! दिग्विजयसिंह ने फोन उठाया और उनका काम कर दिया. उसके बाद उस व्यक्ति से पूछा कि इस काम के कितने पैसे लगते? उसने कहा 20 लाख !! दिग्विजय बोले, जाओ, आधे माफ़ बाकी आधे उनको दे कर आओ !! उनसे मुझे फ़ोन भी करवाना. उसके जाने के बाद खुद दिग्विजय ने उस नेता को फोन लगाया, कुछ हंसी ठिठोली की और कहा कि फलां का काम कर दिया है. आपके पास भेज रहा हूँ.

यह सब हमारी आँखों के सामने घट रहा था. हम उस वक़्त बीड़ी मजदूरों के मंहगाई भत्ते पर अटकी रिपोर्ट को लागू करवाने के लिए मुख्यमंत्री के सामने बैठे थे. दिग्गी बायीं आँख दबा कर हमसे बोले कि यार उसे भी सिस्टम चलाना पड़ता है. तुम लोगो जैसे हरिश्चंद्र नहीँ है बाकी सब.

अभी हाल ही में मुख्य विपक्षी पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया कि उनसे मुख्यमंत्री ने बहुत ही कातर भाव से आग्रह किया था कि भाई जो बोलना हो बोलो, मगर भाभी जी को इस मामले में मत लाओ. हमने बारीकी से देखा तो पाया कि खूब गरमागरमी के दौर में भी इस नेता ने उस आग्रह का मान बनाये रखा !! यह है बैतालों पर सवार विक्रमों की एकता.

पूंजीवादी राजनीति के इस हम्माम में देखने सुनाने के लिए कुछ भी कहा जाए, मप्र में इन दोनों पार्टियों का थीम सांग 1949 में बनी फ़िल्म का गीत- तू मेरा चाँद में तेरी चाँदनी- है और रहेगा. इसमें “सच को बताना नहीं दिल्लगी- नहीँ दिल्लगी” और जोड़ लीजिये !! बस हो गया सत्ता गान पूरा.

दिग्गी के गोदाम में भी भानुमति के अनेक पिटारे होंगे. मगर वे उन्हें नही खोलेंगे. पुराने सरदार हैं, जानते हैं कि एक नम्बर के काम में भले न बरती जाए मगर दो नम्बर के कामों की गोपनीयता बनाये रखने का अलिखित संविधान और अनुल्लंघनीय मर्यादा होती है. सिस्टम चलाना पड़ता है !!

बेहतर होगा कि इन्साफ की उम्मीद लगाए व्यापमं पीड़ित पुनर्जन्म में विश्वास करना शुरू कर दें क्योंकि अब नूरा कुश्ती के एक एपिसोड के बाद कबड्डी शुरू हो चुकी है, और इनकी चली तो यह किसी नतीजे पर पहुंचने में पूरा कलियुग गुजार देगी.

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