फंस सकती है हिमाचल सरकार

शिमला | एजेंसी: ब्यास त्रासदी में हिमाचल सरकार घिरती जा रही है. गौरतलब है कि ब्यास नदी में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्रों और एक टूर ऑपरेटर की मौत हो गई थी.

उच्च न्यायालय में सौंपी गई एक सरकारी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सरकारी स्वामित्व वाली 126 मेगावाट की लारजी पनबिजली परियोजना में घोर लापरवाही का साम्राज्य है.

सबसे खराब तो यह कि विश्वस्त सूत्रों ने कहा कि यह तथ्य है कि त्रासदी वाले दिन लारजी परियोजना को उत्पादन घटाने के लिए कहा गया था और प्लांट के अधिकारियों ने घटाने की प्रक्रिया शुरू करने के बजाय इसे बंद ही कर दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि परियोजना के जलाशय में जलस्तर बढ़ गया और उसे पानी छोड़ना पड़ा जिससे ब्यास नदी में उफान आ गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 जून को परियोजना के अधिकारियों ने अकस्मात 450 क्यूसेक पानी ब्यास नदी में छोड़ दिया. अपनी छुट्टियों में मनाली घूमने आए छात्र नदी की पेटी में चट्टानों पर खड़े हो कर तस्वीरें ले रहे थे और वे अचानक तेज हुए बहाव की चपेट में आकर बह गए.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार को 24 जून तक उठाए गए कदमों की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश देने वाला उच्च न्यायालय अब जांच की संभावना बढ़ा सकता है क्योंकि राज्य की अधिकांश पनबिजली परियोजनाओं में पानी छोड़ने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है.

हिमाचल प्रदेश देश में सबसे ज्यादा पनबिजली परियोजनाओं वाला राज्य है. राज्य में 150 सूक्ष्म और मेगा रन-ऑफ-दी-रीवर परियोजनाएं हैं जो निजी या सार्वजनिक क्षेत्र संचालित हैं.

इतनी ही संख्या में ऐसी परियोजनाएं निर्माण की विभिन्न अवस्थाओं में हैं. ये परियोजनाएं मुख्य रूप से सतलुज, ब्यास, रावी, यमुना और चेनाव नदियों या उनकी सहायक धाराओं पर निर्मित हो रही हैं.

मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ को सौंपी गई सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि लारजी परियोजना से ब्यास में बिना चेतावनी पानी छोड़ने में प्रणाली की विफलता रही.

त्रासदी की जांच करने वाले संभागीय आयुक्त ओंकार शर्मा ने रिपोर्ट में कहा है कि बांध से नदी में छोड़े गए पानी से जलस्तर एक ही घंटे के भीतर 20 क्यूमेक्स से 450 घन मीटर प्रति सेकेंड हो गया.

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